कूड़ा बीनकर गुजर-बसर करने वाले पिता अपनी तीरंदाज बेटी के लिए धनुष खरीदने में सक्षम नहीं थे। वह रियो में उधार के धनुष से निशाना साधेंगी।
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रोहतक की तीरंदाज बेटी ने दिलाया पैरा ओलंपिक का टिकट
- फोटो : अमर उजाला
ये आलम है रियो पैरालंपिक में क्वालीफाई कर इतिहास रचने वाली महिला तीरंदाज पूजा के पास निशाना साधने के लिए अपना धनुष तक नहीं है। कूड़ा बीनकर गुजर-बसर करने वाले उसके पिता बेटी के लिए धनुष खरीदने में सक्षम नहीं थे। हालांकि कोच ने पूरा साथ दिया और अब पूजा रियो की धरती पर कोच के धनुष से निशाना साधेगी। ओलंपिक वालों को सरकार भले ही अनेक सुविधाएं देती हो लेकिन पैरालंपिक खिलाड़ियों के साथ भेदभाव सिस्टम पर सवाल उठा रहा है।
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रोहतक की तीरंदाज बेटी ने दिलाया पैरा ओलंपिक का टिकट
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ओलंपिक के बाद दूसरा सबसे बड़ा खेल महाकुंभ 7 सितंबर से उसी रियो में शुरू हो रहा है, जहां पिछले महीने ही ओलंपिक हुआ। पैरालंपिक में इस बार भारतीय खिलाड़ियों से कुछ ज्यादा ही उम्मीद हैं, क्योंकि कई खिलाड़ियों ने इतिहास रचकर इसमें जगह बनाई है। रियो पैरालंपिक के लिए पहली बार किसी महिला तीरंदाज ने क्वालीफाई किया है। ये इतिहास रचने वाली रोहतक की पूजा की हालत किसी से छुपी नहीं है।
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रोहतक की तीरंदाज बेटी ने दिलाया पैरा ओलंपिक का टिकट
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शहर में पुराना बस स्टैंड पर रहने वाली पूजा ने विपरीत परिस्थितियों में पैरालंपिक में जगह बनाई है। उसके पिता भोलाराम रेहड़ी लेकर कूड़ा जमा करते हैं और उससे ही घर का गुजारा होता है। ऐसे हालात में भी पूजा ने पढ़ाई के साथ तीरंदाज बनने का सपना देखा और उस सपने को पूरा करते हुए पैरालंपिक तक जगह बनाई। हालांकि पूजा के पास निशाना लगाने के लिए अपना धनुष तक नहीं है और वह उधार के धनुष से रियो की धरती पर निशाना साधेगी।
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रोहतक की तीरंदाज बेटी ने दिलाया पैरा ओलंपिक का टिकट
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यह धनुष उसने अपने कोच संजय सुहाग से उधार लिया है। पूजा कहती हैं कि उसकी पारिवारिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह अपना धनुष खरीद सके। उसे कोच संजय सुहाग से काफी मदद मिल रही है। उनके ही धनुष से प्रैक्टिस कर रही है और अब उसी धनुष से पैरालंपिक में निशाना लगाएगी।