अत्याधुनिक फाइटर जेट राफेल में एक ऐसा हथियार फिट है, जो इसे दुश्मनों का 'काल' बनाता है, क्योंकि उससे बचने की गुंजाइश ही नहीं है। छिपना तक बेकार साबित हो जाएगा।
3700 किलोमीटर तक मारक क्षमता रखने वाले फाइटर जेट राफेल में राडार पर एक टन का कैमरा लगा है। यही सुविधा इसे तमाम लड़ाकू विमानों से पूरी तरह से अलग करती है। एक टन के कैमरे से इसका निशाना अचूक होगा। कैमरा इतना सेंस्टिव(संवेदनशील) है कि जमीन पर छोटी से छोटी चीज को भी इससे देखा जा सकेगा। साधारण शब्दों में यदि कहा जाए तो इससे मछली की आंख यानि पिन प्वाइंट पर आसानी से निशाना लगाया जा सकेगा।
अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में राफेल की तैनाती के लिए एक ऐसी स्क्वाड्रन को जिंदा किया गया है, जिसे एयरफोर्स ने समाप्त कर दिया था। इस स्क्वाड्रन का नाम है 17 गोल्डन एरो। पिछले साल वायुसेना के पूर्व अध्यक्ष बीएस धनोआ ने इसको जिंदा किया था और अब यही स्क्वाड्रन अंबाला में राफेल की कमान संभालेगी।
सात प्रशिक्षित पायलट इन पांच राफेल लड़ाकू विमानों को भारत तक सकुशल उड़ा कर लाए। यह सात पायलट करीब एक साल से फ्रांस में राफेल के संचालन की ट्रेनिंग ले रहे थे। अब ये पायलट भारत में अन्य पायलटों को प्रशिक्षण देंगे और खुद भी फ्रांस में ट्रेनिंग लेते रहेंगे।
अंबाला स्टेशन से 40 से 45 मिनट के बीच राफेल पाक और चीन बॉर्डर पर पहुंच जाएंगे। फिलहाल तैनाती के सात दिन के भीतर ही राफेल को एलएसी पर तैनात होना है। राफेल एलएसी से ही एलओसी पर भी कड़ी निगरानी रखेगा।