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चीन कर सकता है सरप्राइज अटैक, राफेल की जिम्मेदारी बढ़ेगी, 'गोल्डन एरो' ही पूर्वी मोर्चे संभालेगी
Fri, 09 Oct 2020 10:30 AM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 09 Oct 2020 10:30 AM IST
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राफेल विमान
- फोटो : स्पेशल अरेंजमेंट
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भारतीय सेनाओं को चीन की ओर से सरप्राइज अटैक किए जाने का खतरा है। हालांकि आर्मी और इंडियन एयरफोर्स पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं। मगर वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल पूर्वी मोर्चों की निगरानी भी मौजूदा राफेल विमानों को सौंपे जाने की तैयारी कर ली गई है।
राफेल एयरक्राफ्ट
- फोटो : Amar Ujala
लड़ाकू विमान राफेल की अगली खेप आने तक अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में तैनात की गई राफेल की गोल्डन एरो स्क्वाड्रन ही पूर्वी मोर्चों की निगरानी करेगी। यहीं से उड़ान भरकर राफेल सेंट्रल एयर कमांड समेत पूर्वी मोर्चों पर स्थित रणनीतिक एयरफोर्स स्टेशनों का दौरा करते रहेंगे। लद्दाख रीजन में एलएसी पर चीन सैनिकों द्वारा की जा रही हरकतों के साथ-साथ पूर्वी मोर्चों पर भी चीन द्वारा खुराफात किए जाने की आशंका अभी बरकरार है। इसलिए वेस्टर्न एयर कमांड के अधीनस्थ राफेल विमान की स्क्वाड्रन ही पूर्वी मोर्चों की भी निगरानी करती रहेगी।
राफेल लड़ाकू विमान (फाइल फोटो)
- फोटो : Indian Air Force
बताते चलें कि भारत को मिलने वाले कुल 36 राफेल विमानों में से पांच राफेल आए हैं, जो अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में मौजूद हैं। जबकि वेस्टर्न एयर कमांड को अभी 13 और राफेल मिलने हैं। इसके अलावा शेष 18 राफेल अन्य एयर कमांड को मिलेंगे। पांच राफेल विमानों की पहली खेप 29 जुलाई को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में बनाई गई 17 गोल्डन एरो स्क्वाड्रन को मिल चुकी है। सूत्रों ने बताया कि राफेल विमानों की अगली खेप भी जल्द भारत आने वाली है, जिसे ईस्टर्न एयर कमांड के अधीनस्थ पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन में तैनात करने की प्रबल संभावना है। तब तक पूर्वी मोर्चों की निगरानी का जिम्मा मौजूदा सुरक्षा कारणों को देखते हुए अंबाला में तैनात राफेल की स्क्वाड्रन को ही दिया गया है।
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Rafale Jet
- फोटो : दसां एविएशन
सूत्रों ने बताया कि लद्दाख रीजन की तरह पूर्वी मोर्चों पर भी चीन ने कुछ सरहदी इलाकों में अपनी सेनाएं बढ़ाने का काम किया है, जिसके चलते भारतीय वायुसेना प्रमुख आरकेएस बदौरिया भी पूर्वी मोर्चों का दौरा कर चुके हैं और इस रीजन में मौजूद एयरफोर्स स्टेशनों को हर परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दे चुके हैं। ईस्टर्न एयर कमांड के अधीनस्थ पंद्रह एयरफोर्स स्टेशन मौजूद हैं, जिनमें से कुछ एयरफोर्स स्टेशन रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील हैं। वैसे तो इन स्टेशनों में सुखोई 30 एमकेआई, एमआई-17 हेलीकॉप्टर, सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस इत्यादि की स्क्वाड्रन समेत कई एडवांस लैंडिंग ग्राउंड मौजूद हैं। मगर वायुसेना चाहती है कि मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनज़र पूर्वी मोर्चों पर भी राफेल विमानों से ही निगरानी की जाए।
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Rafale Jets
- फोटो : दसां एविएशन
इसलिए अंबाला में तैनात दो राफेल विमान लद्दाख रीजन में एलएसी की निगरानी में लगाए जा चुके हैं और दो विमानों को पूर्वी मोर्चों पर निगरानी का जिम्मा दिया गया है। ये दोनों विमान अपनी एक्सरसाइज के दौरान कुछ दिनों के अंतराल पर सेंट्रल एयर कमांड के साथ-साथ ईस्टर्न एयर कमांड के कुछ रणनीतिक एयरफोर्स स्टेशनों का दौरा करते रहेंगे और वहीं से वे पूर्वी मोर्चों की हवाई निगरानी भी करेंगे। जबकि एक राफेल हर वक्त अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात रहेगा। लद्दाख रीजन में तैनात दो राफेल वेस्टर्न एयर कमांड के अन्य रणनीतिक एयरफोर्स स्टेशनों का भी दौरा करते रहेंगे।