जूते पहनकर हरकी पैड़ी आना हो या कल्कि महोत्सव में नाचना। अकसर विवादों में रहने वाली राधे मां कौन हैं और कहां से? आइए बताते हैं आपको।
राधे मां एक बार फिर से सुर्खियों में हैं, वो भी मंच पर साधु संतों के बीच नाचने को लेकर। उत्तरप्रदेश के संभल में आयोजित श्री कल्कि महोत्सव में जब पॉप सिंगर राम शंकर ने जब रमा शंकर ने यारो सब दुआ करो मिल के फरियाद करो गीत सुनाया तो साधु संत के अलावा राधे मां भी झूम उठीं। वे अपनी सीट से खड़ी होकर मंच पर ही थिरकने लगीं। इतना ही नहीं, मंच से नीचे उतरकर अपने भक्तों के बीच में भी वे खूब नाचीं।
3 of 12
हरिद्वार में राधे मां
- फोटो : amar ujala
राधे मां, एक सीधी सी 10वीं पास पंजाबन लड़की थी। 18 साल की उम्र में शादी हो गई थी। पंजाब के एक हलवाई के बेटे की बहू थी। राधे मां उर्फ गुड़िया उर्फ सुखविंदर कौर का जन्म 1964 में गांव दोरांगला (गुरदासपुर) में हुआ था। जब सुखविंदर कौर 18 साल की थी तो उनका विवाह करम सिंह हलवाई के बेटे मोहन सिंह के साथ हो गया। मोहन सिंह ने कुछ समय मिठाई की दुकान की और फिर दोहा कतर चला गया।
4 of 12
हरियाणा के सोनीपत में चौंकी लगाती राधे मां
- फोटो : अमर उजाला
पति का विदेश जाना राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इस दौरान उसने कपड़े भी सिले और जल्द ही अध्यात्म की दिशा में मुड़ गई। 23 साल की उम्र में सुखविंदर मुकेरियां में डेरा परमहंस बाग के महंत रामाधीन दास की शिष्या बन गई। महंत ने उसे आध्यात्मिक दीक्षा दी और ‘राधे मां’ के रूप में नया नाम दिया। आज उनके लाखों फोलोअर्स हैं। वे अपने अनोखे पहरावे को लेकर चर्चा में रहती हैं।
5 of 12
हरिद्वार में राधे मां
- फोटो : amar ujala
नया नाम मिलने के बाद वह सत्संग करने लगी और खानपुर में मां भगवती मंदिर राधे मां का आध्यात्मिक केंद्र बन गया। लोग कहते हैं कि इस तरह के सत्संग के दौरान वह अपने भक्तों को वरदान देती थी जिससे उनके संकट दूर रहते थे। ऐसा ही एक आशीर्वाद राधे मां ने मुंबई के एक भक्त को दिया और उसका कोई गंभीर मसला हल हो गया।