पंजाब सरकार ने हरियाणा की जींद रियासत के गौरवशाली इतिहास को सहेजने का बीड़ा उठाया है। 250 साल पुरानी इस रियासत के करीब 850 दुर्लभ छायाचित्रों का पंजाब के पर्यटन विभाग ने डिजिटलाइजेशन करवा कर उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजा है।
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Punjab Save's Glorious history of Jind
हालांकि जींद रियासत से जुड़ी कोई बड़ी निशानी अब नहीं बची है। यहां का किला भी अब जमींदोज हो चुका है। जींद रियासत पर 1763 में फुलकियां सिखों का राज कायम हुआ था। नाभा के साथ जंग के बाद संगरूर भी इस रियासत का हिस्सा बन गया तो 1827 में राज्य का हेडक्वार्टर जींद से संगरूर शिफ्ट कर दिया गया। उसकेबाद से सियासत की गतिविधियों से लेकर विकास का केंद्र संगरूर ही रहा। संगरूर का उस समय सामरिक और व्यापारिक महत्व था।
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पंजाब सरकार द्वारा संरक्षित की गई ये ब्लैक एंड व्हाइट फोटोग्राफ वर्ष 1905 केआसपास से शुरू होकर अगले कई वर्षों की हैं। इनमें रेजीमेंट का निरीक्षण करते राजा, मार्केट, लेडी मिंटो रणबीर गर्ल्स कॉलेज, वेटरीनरी अस्पताल, दीवाने-खास व दरबार हॉल, हाईस्कूल, गोल्डन जुबली अस्पताल, राजा की विशेष ट्रेन के संगरूर पहुंचने पर स्टेशन पर स्वागत केलिए खड़े लोग शुमार है, वहीं परेड से लेकर दिल्ली में किंग जॉर्ज की ताजपोशी की भी फोटोग्राफ है।
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उन्हें देख कर लगता है कि उस समय संगरूर काफी विकसित था। तस्वीरें उस समय के आर्थिक व सामाजिक हालात भी बयां करती हैं। ये तस्वीरें संगरूर की लाइब्रेरी में काफी समय से धूल खा रही थीं। पर्यटन विभाग ने इन्हें निकाल कर एक निजी कंपनी को संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी। इस काम में करीब तीन साल का समय लगा।
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उसकेबाद विभाग ने पंजाब डिजिटल लाइब्रेरी से सभी फोटोग्राफ का डिजिटलाइजेश करवाया, ताकि ये हमेशा के लिए आने वाली पीढ़ियों केलिए उपलब्ध रहें। सारी फोटोग्राफ अब संगरूर लाइब्रेरी पहुंचा दी गई हैं। संगरूर में एक म्यूजियम निर्माणाधीन है, उसके बनते ही फोटोग्राफ वहां प्रदर्शित की जाएंगी।