अगर आप यूजीसी नेट एग्जाम देने की सोच रहे हैं तो पढ़ लिजिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट का एक अभूतपूर्व फैसला, बड़ा नुकसान होने से बचाएगा।
दरअसल, हाईकोर्ट ने एक याचिका पर अभूतपूर्व फैसला सुनाया, जिसमें गलत आंसर-की अपलोड होने पर जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। फैसला सुनाते हुए यह तय कर दिया गया है कि अगर गलत आंसर-की वेबसाइट पर अपलोड हो जाए तो उससे पेपर सेटर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
पेपर सेटर को आंसर-की के खिलाफ दर्ज आपत्तियों का न सिर्फ जवाब देना होगा बल्कि इन्हें दूर करके तसदीक के लिए किसी अन्य निष्पक्ष एक्सपर्ट्स के पास भी भेजना होगा। जस्टिस अजय तिवारी ने यह फैसला ज्वाइंट सीएसआईआर-नेट परीक्षा में गलत आंसर-की वेबसाइट पर अपलोड किए जाने के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनाया।
हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि इस गलती के लिए प्रतिवादी ही जिम्मेदार है लिहाजा पहले जो गलत आंसर-की अपलोड किए जाने से जिन परीक्षार्थियों को पास घोषित किया गया था, उन्हें बाद में सही आंसर-की अपलोड करने पर कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही जो गलत आंसर-की के चलते असफल हो गए थे, उन्हें अब सफल करार देकर एडजस्ट करना होगा, चाहे इसके लिए सीटें ही क्यों न बढ़ानी पड़े।
हाईकोर्ट का यह फैसला इस तरह के कई मामलों में बेहद ही महत्वपूर्ण साबित होगा। याचिकाकर्ता छात्रा रमनदीप कौर दिसंबर, 2016 में हुई ज्वाइंट सीएसआईआर-नेट परीक्षा में रिजल्ट घोषित किए जाने के बाद आंसर-की में परिवर्तन किए जाने के कारण ज्वाइंट रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) और लेक्चररशिप (नेट एक्जाम) के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी थीं।