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दुश्मन को नेस्तनाबूत करने में माहिर है 'अग्नि मिसाइल', अब और ज्यादा घातक होगा, जानिए खासियतें

Wed, 20 Feb 2019 01:00 PM IST
खुशबू गोयल राजेश शांडिल्य, अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
राजेश शांडिल्य, अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 20 Feb 2019 01:00 PM IST
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Pulwama Terror Attack, indian army agni missile profile and qualities, NIT Kurukshetra
Agni-II missile
भारतीय सेना की 'अग्नि मिसाइल' दुश्मन को नेस्तनाबूत करने में माहिर है। लेकिन अब इसमें एक ऐसा बदलाव होने जा रहा है, जानकर सब थर्रा जाएंगे। खासियतें जानने के लिए क्लिक करें।
Pulwama Terror Attack, indian army agni missile profile and qualities, NIT Kurukshetra
अग्नि-1 मिसाइल
दरअसल अब यह मिसाइल और ज्यादा घातक होगा। स्वदेशी सामग्री एवं तकनीक से अग्नि मिसाइल की ताकत और मारक क्षमता में इजाफा किया जाएगा। देश की सामरिक आवश्यकता को और अधिक मजबूती देने के लिए इस दिशा में हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीओ) में इस पर कार्य चल रहा है। यह जानकारी डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अग्नि मिसाइल परियोजना के निदेशक डॉ. वीवी राव ने दी।
Pulwama Terror Attack, indian army agni missile profile and qualities, NIT Kurukshetra
अग्नि 4 मिसाइल
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र में मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए डॉ. वीवी राव ने न्यू फ्रंटीर्यस इन इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नॉलाजी विषय पर अपने व्याख्यान में बताया कि डीआरडीओ अग्नि मिसाइल का अगला रूप तैयार करने में जुटा है। इसकी विशेषता मिसाइल में उपयोग की जा रही विशुद्ध स्वदेशी तकनीक होगी। इसके इस्तेमाल से एक तो मिसाइल पर खर्च होने वाली लागत कम होगी।

 
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अग्नि-5 मिसाइल
दूसरा, स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल के बाद अग्नि मिसाइल का वजन कम करके इसकी मारक क्षमता को भी बढ़ाया जा सकेगा। डॉ. राव का मानना है कि मिसाइल का वजन कम करने और मैकेनिकल प्रॉपर्टीज अच्छी होने से मिसाइल की कार्यक्षमता और ज्यादा बेहतर होगी। उन्होंने बताया कि इससे पहले जो ड्राइव चलाते थे, उसमें हाइड्रोलिक और न्यूमेटिक रहता था, लेकिन अब इसे इलेक्ट्रो मैकेनिकल ड्राइव पर तैयार किया जा रहा है।
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अग्नि मिसाइल
मिसाइल के मोटर्स
डॉ. राव के अनुसार, मिसाइल मोटर्स में पहले मैटेलिक एलॉय होते थे, लेकिन अब कंपोजिट होंगे। पहले मैटल के एलॉय ही उपयोग होते थे, लेकिन अब कंपोजिट प्रॉपर्टी से मिसाइल का वजन कम होगा। इससे मारक क्षमता में इजाफा होगा। इस तरह की स्वदेशी सामग्री से सबसे पड़ा लाभ मिसाइल बनाने पर होने खर्च को कम करने में सहायक होगा।
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