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कैंसर से भी खतरनाक है ये बीमारी : पीजीआई चंडीगढ़ ने खोजा जांच का सटीक तरीका, दुनिया का पहला संस्थान बना

Wed, 17 Mar 2021 01:08 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 17 Mar 2021 01:08 AM IST
सार

  • पीजीआई विश्व का पहला संस्थान, जिसने दुर्लभ बीमारी का पता लगाने के लिए ढूंढा नया तरीका
  • कुशिंग बीमारी के लिए विशेष तरह का पेट स्कैन करेंगे, एमआरआई से सिर्फ 60 फीसदी को फायदा

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PGI Chandigarh Developed a Technique to Detect Cushing syndrome
पीजीआई चंडीगढ़। - फोटो : फाइल फोटो।

पीजीआई चंडीगढ़ ने मंगलवार को एक और ऐतिहासिक इबारत लिख डाली। संस्थान के एंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट ने न्यूक्लियर मेडिसिन के सहयोग से गंभीर बीमारी में शामिल कुशिंग सिंड्रोम का पता लगाने के लिए एक सटीक तरीका खोज निकाला। डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी को पकड़ने के लिए अब तक एमआरआई का सहारा लिया जाता था लेकिन इससे सिर्फ 60 फीसदी मरीजों को ही फायदा होता था लेकिन अब इस बीमारी को ढूंढने के लिए पीजीआई के डॉक्टर विशेष तरह के पेट स्कैन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो 99 फीसदी सटीक परिणाम देता है। पीजीआई के मुताबिक, इसे सीआरएच पेट स्कैन कहते हैं। इसके साथ पीजीआई विश्व का पहला ऐसा संस्थान बन गया है, जो इस तरीके से कुशिंग बीमारी को पकड़ रहा है। पीजीआई के एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय भडाडा ने बताया कि कुशिंग सिंड्रोम कैंसर से भी ज्यादा खतरनाक बीमारी है।

PGI Chandigarh Developed a Technique to Detect Cushing syndrome
प्रेस कॉन्फ्रेंस करते पीजीआई के चिकित्सक। - फोटो : फाइल फोटो।

यह धीरे-धीरे शरीर के सभी अंगों को खत्म कर देता है। जिस तरह से आतंकियों के स्लीपर सेल काम करते हैं, बिल्कुल उसी तरह से यह बीमारी शरीर के अंदर छिपकर नुकसान पहुंचाती रहती है। सीआरएच पेट स्कैन न सिर्फ बीमारी को पकड़ता है बल्कि शरीर को क्या नुकसान पहुंचा रहा है, उसके बारे में सटीक परिणाम देता है। डॉ. भडाडा के मुताबिक, यह एक हार्मोनल विकार है, जो कोर्टिसोल के अधिक उत्पादन से जुड़ा है। कोर्टिसोल शरीर की ओर से उत्पादित एक हार्मोन है, जो तनाव से लड़ने के लिए एक ग्रंथि का निर्माण करता है।

PGI Chandigarh Developed a Technique to Detect Cushing syndrome
पीजीआई चंडीगढ़। - फोटो : फाइल फोटो।

धीरे-धीरे यह पीट्यूटेरी ग्लैंड में जमा होता है और वह बीमारी का कारण बनता है। यह इतना छोटा होता है कि एमआरआई में भी पकड़ में नहीं आता, लेकिन पीजीआई की नई तकनीक सीआरएच पैट स्कैन से इसका पता लगाया जा सकता है। पता लगने के बाद इसे सर्जरी कर निकाला जा सकता है। पीजीआई में इस बीमारी के 220 पंजीकृत मरीज हैं।

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PGI Chandigarh Developed a Technique to Detect Cushing syndrome
प्रेस कॉन्फ्रेंस करते डॉ. संजय भडाडा।

नई तकनीक से 24 मरीजों में बीमारी का पता लगाया
पीजीआई ने नई तकनीक से 24 मरीजों में बीमारी का पता लगाया है। अब से विश्वस्तरीय जनरल में प्रकाशित किया गया है। कुशिंग सिंड्रोम का एक लक्षण यह भी होता है कि इसमें लोगों के हाथ पैर पतले होते जाते हैं और पेट निकलता जाता है। इसका खाने-पीने से संबंध नहीं होता है, बल्कि जेनेटिक कारण हो सकता है। यदि आप बाहर का खाने-पीने में परहेज करते हैं और सिर्फ पौष्टिक आहार खाते हैं, इसके बावजूद आपकी तोंद निकल रही है तो यह कुशिंग बीमारी का लक्षण हो सकता है।

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PGI Chandigarh Developed a Technique to Detect Cushing syndrome
पीजीआई चंडीगढ़। - फोटो : फाइल फोटो।

डायबिटीज खत्म करने के लिए विशेष कार्य
डॉ. भडाडा ने बताया कि वे एक विशेष मेडिकल थैरेपी पर काम कर रहे हैं, जिससे डायबिटीज को खत्म किया जा सकता है। इसके लिए वह मरीजों से संपर्क कर रहे हैं। यदि कोई मरीज इस स्टडीज में शामिल होना चाहता है तो वह 7087007322 पर शुक्रवार व शनिवार को शाम छह बजे से सात बजे के बीच संपर्क कर सकता है। स्टडी में शामिल होने के लिए 65 साल से कम उम्र हो, दो साल से टाइप टू डायबिटीज से पीड़ित हो और इंसुलिन न लेता हो। इसके साथ किडनी संबंधी कोई बीमारी भी नहीं होनी चाहिए।

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