पेट्रोल पंप पर तेल की चोरी के मामले देखे थे, अब क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर भी तेल की चोरी का खेल खेला जाने लगा है। जानना चाहेंगे कैसे, तरीका देखकर आप चौंक जाएंगे।
चंडीगढ़ में सेक्टर-9 स्थित सिटको के पेट्रोल पंप से 15 कर्मचारियों के तबादले के बाद क्रेडिट से भुगतान में बड़ा घालमेल सामने आया है। एक से 11 मई तक के क्रेडिट से भुगतान की बात करें तो लगभग 525 पर्चियां पेट्रोल पंप को मिली थीं। इन पर्चियों पर 40, 50 और 70 लीटर के हिसाब से तेल की मात्रा अंकित है। इस हिसाब से औसत प्रतिदिन 11 हजार लीटर पेट्रोल और 10 हजार लीटर डीजल वाहनों में डाला जा रहा था। यह सभी वाहन सरकारी बताए जा रहे हैं।
31 मई को कर्मचारियों के तबादले होने के बाद यह पर्चियां घटकर 350 के आसपास हो गईं हैं। सूत्र बताते हैं कि टेंपरिंग की घटतौली तो अलग बात है। कर्मचारियों के तबादले के बाद केवल 11 दिन की पर्चियों की बात करें तो यहां 6 हजार लीटर तेल इन 11 दिनों में क्रेडिट कार्ड से नहीं बेचा गया, जबकि प्रतिदिन कैश और क्रेडिट की सेल 22 लाख से अधिक है, जो पहले से चली आ रही है, यानी क्रेडिट के जरिए तेल की चोरी हो रही है।
बताया जा रहा है कि क्रेडिट में चोरी किए गए तेल को कैश में बेचकर करोड़ों की बंदरबाट की जा रही थी। इस पूरे घोटाले में सिटको के कई अफसर भी शामिल हैं, क्योंकि चर्चा यह है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इतना बड़ा कारनामा करना कर्मचारियों के बस की बात नहीं है। सेक्टर-9 के पेट्रोल पंप पर लगी मशीनों को ठीक करने के लिए आए पेट्रोलियम सर्विस सेल के इंजीनियरों की रिपोर्ट में टेंपरिंग के साथ और क्रेडिट की पर्चियों में घालमेल का खुलासा हुआ।
इस खुलासे से यूटी प्रशासन में भी हड़कंप मच गया। सूत्रों की मानें तो कर्मियों के तबादले होने के बाद क्रेडिट पर बिकने वाले तेल की मात्रा में करीब छह हजार लीटर की कमी मिली है, जबकि प्रतिदिन की कैश और क्रेडिट की सेल पहले के बराबर है। जून महीने के पहले 11 दिनों की बात करे तो मई महीने के पहले 11 दिनों की तुलना में लगभग 175 पर्चियों में कमी आई है। औसतन प्रत्येक पर्ची में 40 लीटर तेल प्रतिदिन के हिसाब से वाहनों में भरा जाता रहा है।