फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

श्री गुरु नानक देव जयंती आज: पंजाब समेत पूरे विश्व में गूंजा... नानक नाम जहाज है चढ़े सो उतरे पार

Fri, 19 Nov 2021 09:22 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 19 Nov 2021 09:22 AM IST
विज्ञापन
Parkash Parv of Shri Guru Nanak Dev ji celebrated Today
करतारपुर साहिब गुरुद्वारा। - फोटो : फाइल
सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी की आज 552वीं जयंती है। पंजाब समेत पूरे विश्व में प्रथम पातशाही का प्रकाश पर्व श्रद्धा और उल्लास से मनाया जा रहा है। वहीं इस बार करतारपुर कॉरिडोर के दोबारा खुलने से सिख संगत की खुशी दोगुनी हो गई है। ननकाना साहिब में जन्मे श्री गुरु नानक देव जी ने पंजाब के सुल्तानपुर लोधी में मूल मंत्र का उच्चारण कर गुरु ग्रंथ साहिब की बुनियाद डाली थी। यहां पर वे लगभग 14 साल भक्ति में लीन रहे। यहीं से उन्होंने अपनी यात्रा का आगाज किया था। 


लोगों को सही राह दिखाने के लिए अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने लगभग 38 हजार मील का सफर तय किया था। इन्हें उदासियां कहा जाता है। चार उदासियां पूरी करने के बाद अपनी जिंदगी का अंतिम समय गुरु नानक देव जी ने श्री करतारपुर साहिब में बिताया था, जहां उन्होंने 17 वर्ष 5 माह 9 दिन अपने हाथों से खेती भी की। गुरुनानक जी ने यहीं 'नाम जपो, किरत करो और वंड छको' का सबक दिया था। करतारपुर साहिब से ही पवित्र लंगर की शुरुआत की गई थी। यहीं पर 22 सितम्बर 1539 में उन्होंने आखिरी सांस ली। इससे पहले उन्होंने दूसरे गुरु अंगद देव साहिब को गद्दी सौंपी थी। 
Parkash Parv of Shri Guru Nanak Dev ji celebrated Today
करतारपुर साहिब गुरुद्वारा। - फोटो : फाइल
सिखों के लिए बेहद खास करतारपुर साहिब गुरुद्वारा अभी पाकिस्तान में है। 2019 में प्रथम पातशाही की 550वीं जयंती पर भारत और पाकिस्तान सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर बनाकर नानक नाम लेवा संगत को एक स्वर्णिम उपहार दिया था। 
 
Parkash Parv of Shri Guru Nanak Dev ji celebrated Today
करतारपुर साहिब गुरुद्वारा। - फोटो : फाइल
भाई मरदाना जी की रबाब की धुनों पर एक ओंकार में लीन गुरु नानक देव जी ने चार उदासियों में पूरी दुनिया का पैदल भ्रमण किया था। इसलिए प्रथम पातशाही को 10 से ज्यादा देशों में 14 नामों से पुकारा जाता है। भारत के वे गुरु नानक देव हैं तो पाकिस्तानी उन्हें नानकशाह कहते हैं। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन
Parkash Parv of Shri Guru Nanak Dev ji celebrated Today
चंडीगढ़ सेक्टर 8 में प्रकाश पर्व पर सजा गुरुद्वारा। - फोटो : अमर उजाला
इन उदासियों के दौरान वह जहां-जहां भी गए, वहां इन्हें अलग-अलग नामों से जाना गया। तिब्बत में उन्हें नानकलामा कहा जाता है वहीं रूस में वे नानक कमदार के तौर पर जाने जाते हैं। वहीं उन्हें नेपाल में नानक ऋषि के तौर पर मान दिया जाता है। भूटान और सिक्किम में वे नानक रिपोचिया और श्रीलंका में नानकचार्या के नाम से विख्यात हैं। ईराक में उन्हें नानक पीर, चीन में बाबा फूसा और मिस्त्र में नानक वली कहा जाता है। सऊदी अरब में वे वली हिंद के नाम से जाने गए।  
 
विज्ञापन
Parkash Parv of Shri Guru Nanak Dev ji celebrated Today
अमृतसर में सजा नगर कीर्तन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर एसजीपीसी की ओर से धार्मिक सभा-सोसायटियों और संगतों के सहयोग से श्री अकाल तख्त साहिब से नगर कीर्तन सजाया गया।  एसजीपीसी की प्रधान बीबी जागीर कौर ने श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर सिख जगत को बधाई देते हुए गुरु साहिब के उपदेशों पर चलने की अपील की। 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed