जेल में पैदा हुई और 11 साल की जिंदगी कारागार की चारदिवारी में बिताई। अब जाकर रिहा हुई तो पूरा मामला सामने आया, आप भी जानिए सब कुछ।
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बॉर्डर पर पाकिस्तानी लड़की हिना
पाकिस्तानी लड़की हिना अपनी मां फातिमा और मौसी मुमताज के साथ अमृतसर जेल से रिहा होकर वतन वापिस लौट गई। सबसे ज्यादा चर्चा हिना की हुई, जो 11 साल में पहली बार जेल से बाहर आई थी। बाहर आते ही बच्ची ने कहा कि मैं न पाकिस्तानी हूं, न हिन्दुस्तानी, मैं सबसे पहले एक इंसान हूं और जीने का हक रखती हूं।
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बॉर्डर पर पाकिस्तानी लड़की हिना
8 मई 2006 को हिना की अम्मी फातिमा, खाला मुमताज व नानी रशीदा बेगम समझौता एक्सप्रेस से दोपहर दो बजकर बीस मिनट पर पहुंचे। साढ़े पांच बजे फातिमा, मुमताज व रशीदा बेगम के पासपोर्ट की चेकिंग की गई, सारे दस्तावेज दुरुस्त पाए गए। शाम छह बजे काउंटर नंबर 14 में सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों ने उसके सामान की चेकिंग की तो जाली करंसी करीब छह हजार मिली। शाम 7.30 बजे सीमा शुल्क विभाग ने तीनों महिलाओं के खिलाफ जीआरपी को मीमो जारी कर दिया।
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बॉर्डर पर पाकिस्तानी लड़की हिना
जीआरपी ने जाली करंसी के मामले में तीनों को नामजद करते हुए गिरफ्तार किया। 6 नवंबर 2016 को हिना को फातिमा बेगम ने जन्म दिया, जेल में जन्मी बेटी को लेकर महिला कैदियों ने जश्न मनाया। 21 दिसंबर 2016 को फातिमा बेगम, मुमताज व रशीदा बेगम को हेरोइन तस्करी के मामले में दस-दस साल की सजा और चार लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। 2017 जनवरी में सजा खत्म हो गई, लेकिन जेल में रशीदा बेगम की मौत हो गई।
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बॉर्डर पर पाकिस्तानी लड़की हिना
फरवरी 2017 में अदालत ने जुर्माने की रकम जमा करवाने के बाद रिहाई के आदेश जारी कर दिए। मई 2017 में एडवोकेट नवजोत कौर चब्बा व नवतेज सिंह ने चार लाख रुपये जुर्माने के जमा करवा दिए। जून 2017 में नवजोत कौर चब्बा ने प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री को चिट्ठी लिखी। जुलाई 2017 में हिना के बारे में पाक स्थित भारतीय दूतावास अधिकारी ने पाक सरकार से संपर्क साधा। अगस्त 2017 में पाकिस्तान ने हिना को पाकिस्तान आने की इजाजत देने की बात स्वीकार की।