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अलविदा अंजुम: 4 माह पहले बयां कर दी थी 'मौत' की हकीकत
Fri, 10 Jul 2015 04:35 PM IST
Updated Fri, 10 Jul 2015 04:35 PM IST
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अलविदा अंजुम: 4 माह पहले बयां कर दी थी 'मौत' की हकीकत
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अलविदा धड़कनों को तब कहना जब खुदा को तेरी जरूरत हो..........। मौत से क्या उसे डराओगे जिसने मरना जिंदगी से सीखा। सरदार अंजुम ने 4 माह पहले चंद लफ्ज बयां किए थे, जो अब हकीकत में बदल गए। बेबाकी और क्रांतिकारी सोच के सरदार अंजुम के माथे पर कभी खुद को लेकर शिकन नहीं नजर आई।
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शुगर के बाद गैंगरीन ने कुछ इस कदर बरपाया कि अपने हाथों की अंगुलियों से देश को नई दिशा देने वाले साहित्यकार और शायर पद्म भूषण सरदार अंजुम को हार्ट अटैक के बाद किडनी संबंधी समस्याओं के बाद शुगर और गैंगरीन से बचने के लिए लक्जरी होंडा अकॉर्ड भी गिरवी रखनी पड़ी।
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सरदार अंजुम ने कहा था कि ..वो और थे जो डूब गए एक बूंद में, हम लेकर अपने सिर पर समंदर लेकर खड़े हैं। मौत से बेखौफ सरदार अंजुम कहते हैं कि मुझे खुद की परवाह करने के लिए वक्त ही नहीं मिला, लेकिन जब शरीर ने धोखा शुरू किया तो घरवालों के कहने पर मुझे अस्पताल का सहारा लेना पड़ा।
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पद्मश्री सरदार अंजुम को अब तक 50 से अधिक अवार्ड मिल चुके हैं। इसमें मिलेनियम पीस अवार्ड, पद्म भूषण, पद्मश्री लिटरेरी अवार्ड, पंजाब रत्न, क्लिंटन लिटरेचर एंड एजुकेशन अवार्ड मिल चुके हैं। हालांकि पंजाब सरकार की ओर से घोषित शिरोमणि साहित्यकार अवॉर्ड भी ठुकरा दिया था।
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हमसफर होता जो कोई तो बांट लेते दुनिया, राह चलते लोग कहां समझे मेरी मजबूरियां.....। मशहूर साहित्यकार और शायर सरदार अंजुम की मई में तबियत ठीक होने के बाद जब सेक्टर-दो स्थित निवास पर पहुंचे तो उनसे मुलाकात करने वालों के बीच खास बातचीत में इन पंक्तियों का जिक्र किया था।
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