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ऑपरेशन ब्लू स्टार: 3 दिन में पूरा हुआ था, ऐसा था स्वर्ण मंदिर के अंदर तबाही का मंजर

Tue, 06 Jun 2017 09:11 AM IST
amarujala.com- Presented by: खुशबू गोयल
amarujala.com- Presented by: खुशबू गोयल Updated Tue, 06 Jun 2017 09:11 AM IST
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opreation blue star anniversary, inside view of golden temple after encounter
ऑपरेशन ब्लू स्टार
33 साल बाद भी नहीं भूलता 6 जून 1984 का वो भयानक दिन, जब ऑपरेशन ब्लू स्टार पूरा हुआ और गोल्डन टेंपल में हर तरफ लाशें ही लाशें बिछी थीं।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
6 जून 1984 को जरनैल सिंह भिंडरावाले की मौत के साथ ऑपरेशन ब्लूस्टार खत्म हुआ था। इस ऑपरेशन में 83 सैनिक मारे गए थे जिसमें 3 सेना के अफसर थे। इसके साथ ही कुल 248 लोग घायल हुए और 492 लोग मारे गए थे। दरअसल उस समय पंजाब को भारत से अलग करके अलग से खालिस्तान राष्ट्र बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी थी इसलिए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था।

 
opreation blue star anniversary, inside view of golden temple after encounter
ऑपरेशन ब्लू स्टार
जरनैल सिंह भिंडरावाले सिखों की धार्मिक संस्था दमदमी टकसाल का लीडर था। उसकी कट्टर विचारधारा ने लोगों पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया था इसलिए उसे संस्था की कमान सौंपी गई थी। भिंडरावाले ने गोल्डन टैम्पल परिसर में बने अकाल तख्त में अपना मुख्यालय बना लिया और अकाल तख्त पर कब्जा कर लिया था।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
अकालतख्त पर कब्जे करने का विरोध भी हुआ, लेकिन भिंडरावाले ने इसकी चिंता नहीं की और हिंसा का दौर जारी रहा। भिंडरावाले की इच्छा थी कि हिन्दू पंजाब छोड़ कर चले जाएं जो कि दिल्ली सरकार को चुनौती थी। इंदिरा गांधी को भी जल्द से जल्द किसी फैसले पर पहुंचना था, क्योंकि उनकी मुश्किलें बढ़ती जा रही थीं।
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Operation Blue Star
आखिरकार इंदिरा गांधी ने 1 जून 1984 के दिन अमृतसर को सेना के हवाले कर दिया और ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू किया। इस ऑपरेशन को मेजर जनरल कुलदीप सिंह बरार को सौंपी गई थी। ऑपरेशन के दौरान मंदिर परिसर में रह रहे लोगों को बाहर आने के लिए कहा गया, लेकिन 5 जून तक तक सिर्फ 129 लोग ही बाहर आए।
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