नोटबंदी ने देश में एकदम हड़कंप मचाया था और ब्लैक मनी मुसीबत बन गई थी। ऐसे में लोगों ने कालेधन को सफेद करने के लिए कई तरीके खोजे, आप भी जानिए क्या-क्या?
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नोटबैन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
1. नोटबंदी जब लागू हुई, किसानों की फसल मंडी में आ रही थी तो लोगों ने जे फॉर्म के जरिए काले पैसे को सफेद किया। जे फार्म एक नंबर में फसल बेचने की रसीद है। यह रसीद लेकर किसान अपने सीए के पास जाकर रोकड़ में एंट्री करवाते हैं। वहीं बड़े कारोबारी छोटे किसानों को उनके नाम से फसल मंडी में लाने के लिए एंट्री का लालच देते हैं। तब एंट्री से लेकर आढ़ती की दुकान पर फैसल बेचने का काम होता और फसल की एंट्री कारोबारी के नाम से हो जाती। इस तरह फर्जी जे फार्म का खेल चला।
2. लोगों ने मंदिरों में दान करके भी कालेधन को सफेद किया। मंदिर प्रशासन लोगों द्वारा चढ़ाए गए पैसे को बेनाम डोनेशन के रूप में दिखाते हैं। इस तरीके से लोगों को पुराने के बदले नए नोट मिल गए और इसके लिए मंदिर प्रशासन को कुछ कमीशन। 3. कॉपरेटिव बैंकों और क्रेडिट सोसायटी में पुरानी तारीख की एफडी कराकर ब्लैक से व्हाइट मनी की गई। क्योंकि कॉपरेटिव बैंक और क्रेडिट सोसायटी अभी भी काफी सारे काम कागज और हाथ से करते हैं।
4. गरीब और मजदूर तबके के लोगों को बैंकों की लाइन में लगवाया गया और पुरानी करेंसी नई में बदलवाई गई। पैसे लाइन में लगे लोगों के खाते में चले जाते, जिन्हें लोग बाद में निकलवा लेते। इसके लिए उन लोगों को कुछ कमीशन दे दिया जाता था। 5. नोटबंदी के दौरान लोगों ने जरूरतमंदों को लोन देकर भी ब्लैकमनी को व्हाइट किया, क्योंकि लोन लेने वालों को पैसा व्हाइट मनी में लौटाना था, इसलिए उन्होंने पुरानी करेंसी को नई करेंसी में बदलवाया।
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नोटबंदी, बैंक, करेंसी एक्सचेंज
- फोटो : self
6. नोटबंदी के दौरान पुरानी करेंसी को जनधन खातों में जमा कराकर भी काले धन को सफेद किया गया। इन खातों में एक लाख रुपए तक जमा किए जा सकते हैं। इस नियम का फायदा लोगों ने नोटबंदी में खूब उठाया। 7. नोट बदलवाने का काम करने वाले लोगों के जरिए भी कालाधन सफेद किया गया। ये लोग 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट लेकर उस पर 15 से 80 फीसदी तक कमीशन लेते थे।