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सामने आया नन्हे पुलिस कमिश्नर की मौत का सच, एम्स में नहीं हुई मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Wed, 04 May 2016 11:14 AM IST
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गिरीश शर्मा की मौत का असली सच
- फोटो : amarujala
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राजस्थान पुलिस में एक दिन का कमिश्नर बने 11 वर्षीय गिरीश शर्मा की मौत का असली सच उसके पिता ने दुनिया के सामने ला दिया है। मौत, एम्स में नहीं हुई।
सिरसा निवासी गिरीश के पिता
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सिरसा निवासी गिरीश के पिता का आरोप है कि एम्स के डॉक्टरों की लापरवाही से उसके बच्चे को अस्पताल से निकाल दिया और जब वे उसे लेकर सिरसा आ रहे थे तो धौलाकुआं के पास उसकी मौत हो गई। गिरीश शर्मा का असल में पुलिस अधिकारी बनने का सपना साकार नहीं हो सका। क्रोनिक किडनी रोग से जूझ रहा गिरीश इसी सपने को लिए सोमवार रात दुनिया से विदा हो गया।
राजस्थान पुलिस में एक दिन का कमिश्नर बने 11 वर्षीय गिरीश
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गिरीश की दोनों किडनियां फेल हो चुकी थीं। परिजन उपचार के लिए उसे जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल ले गए। गिरीश का सपना था कि वह एक दिन पुलिस अधिकारी बनकर बुरे लोगों को पकड़कर जेल में डालेगा। जयपुर में इलाज के दौरान संस्था मेक-ए-विश ने उसकी इच्छा पूछी थी तो उसने पुलिस कमिश्नर बनने की बात कही थी। राजस्थान पुलिस के सहयोग से इस संस्था ने गिरीश को 30 अप्रैल 2015 को एक दिन का पुलिस कमिश्नर बनाया था।
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चाट की रेहड़ी लगाने वाले जगदीश शर्मा
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गिरीश के उपचार में उसके पिता नोहरिया बाजार की गली कांडा वाली निवासी और चाट की रेहड़ी लगाने वाले जगदीश शर्मा सारी जमा पूंजी खर्च कर चुके थे। इस बीच कुछ लोगों ने आर्थिक मदद भी की। किडनी ट्रांसप्लांट में लाखों रुपये खर्च होने थे। ऐसे में पूर्व गृह राज्यमंत्री गोपाल कांडा ने ट्रांसप्लांट का सारा खर्च वहन किया। गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में पिछले वर्ष 20 अक्तूबर को गिरीश का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। उसकी माता बबली ने अपनी किडनी दी थी।
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मंगलवार सुबह उसका शिवपुरी में अंतिम संस्कार
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स्वस्थ होकर गिरीश पांच नंवबर को घर लौट आया था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उसका स्वास्थ्य फिर से गिरने लगा। पिछले महीने गिरीश को मेदांता अस्पताल में दाखिल करवाना पड़ा था। उस समय भी मेदांता अस्पताल ने बिना ढाई लाख रुपये जमा करवाए गिरीश को दाखिल करने से इंकार कर दिया था। मामला स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज तक पहुंचा तो उनके हस्तक्षेप के बाद गिरीश को भर्ती किया गया।