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Rewari News: रोडवेज डिपो में आधे से ज्यादा पद खाली, कामकाज पर पड़ रहा असर
Sun, 23 Aug 2026 12:01 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 23 Aug 2026 12:01 AM IST
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बस स्टैंड पर खड़े यात्री। संवाद
रेवाड़ी। राज्य परिवहन के रेवाड़ी डिपो में कर्मचारियों की कमी से यातायात व्यवस्था के साथ ही विभागीय कामकाज बाधित हो रहा है। इसका असर डिपो के संचालन, बसों की व्यवस्था, रखरखाव और यात्रियों को मिलने वाली परिवहन सुविधाओं पर पड़ रहा है।
डिपो में विभिन्न श्रेणियों के कुल 221 स्वीकृत पदों में से 120 पद रिक्त हैं। आधे से अधिक पदों पर कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर तैनाती नहीं होने से जिम्मेदारों को भी व्यवस्थाएं बनाने में परेशानी उठानी पड़ रही है।
सबसे अधिक कमी निरीक्षण और पर्यवेक्षण से जुड़े पदों पर है। उपनिरीक्षक के स्वीकृत 30 पदों में 7 भरे हैं, जबकि 23 पद खाली हैं। निरीक्षक के 20 में से पांच पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं और 15 रिक्त हैं।
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मुख्य निरीक्षक का एकमात्र पद भी रिक्त है। ऐसे में नियमित बिना टिकट यात्रियों की जांच नहीं होने से डिपो की आय पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। वहीं, स्टेशन सुपरवाइजर के दोनों पद और डीजल पंप लिपिक के तीनों पद रिक्त हैं। सहायक कैशियर के दो, कैशियर के दो और स्टोर कीपर के तीन पद भी खाली हैं।
तकनीकी स्टाफ की स्थिति भी चिंताजनक
तकनीकी स्टाफ की स्थिति भी चिंताजनक है। तीन स्वीकृत हेड मैकेनिक पदों में एक, छह टीवीएफ पदों में चार और हेड इलेक्ट्रीशियन का एक पद रिक्त है। तकनीकी कर्मचारियों की कमी का असर बसों की समय पर मरम्मत और फिटनेस व्यवस्था पर पड़ सकता है। इससे बसों को कार्यशाला में अधिक समय तक खड़ा रखना पड़ सकता है और उपलब्ध बसों का संचालन प्रभावित हो सकता है।
37 हेल्परों में 18 पद रिक्त
चतुर्थ श्रेणी के पदों में भी स्थिति बेहतर नहीं है। दस्तावेज के अनुसार 37 स्वीकृत हेल्पर पदों में 19 नियमित कर्मचारी हैं और 18 पद रिक्त हैं। चौकीदार के 15 पदों पर नियमित कर्मचारी नहीं हैं। एचआरएएन के बाद भी पांच पद रिक्त दर्शाए गए हैं। स्टोरमैन के 14 पदों में केवल तीन नियमित कर्मचारी हैं और समायोजन के बाद 11 पद रिक्त हैं। माली के चारों, स्वीपर के 27 में से 22 तथा वाटर कैरियर के तीनों पदों में भी नियमित कर्मचारियों की कमी दर्ज है।
यह काम हो रहे हैं प्रभावित
कर्मचारियों की कमी का असर केवल विभागीय कामकाज तक सीमित नहीं है। पर्याप्त चालक-परिचालक और तकनीकी एवं सहायक स्टाफ के अभाव में बसों की नियमित जांच, मरम्मत, सफाई, समयबद्ध संचालन और यात्रियों को बेहतर सेवा देना किसी चुनौती से कम नहीं है। कई बार कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ता है, जिससे काम का दबाव बढ़ता है। वहीं, बसों के समय पर नहीं चलने, खराब बसों के कारण फेरे प्रभावित होने और व्यवस्था संबंधी परेशानियों का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसे में डिपो की स्वीकृत पदों के मुकाबले रिक्तियों को भरना जरूरी है, ताकि बस संचालन सुचारु हो और यात्रियों को समय पर सुरक्षित एवं बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।
वर्जन:
परिवहन विभाग की ओर से ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी शुरू की गई है। इससे कर्मचारियों के रिक्त पदों पर नियुक्ति की जा सकेगी। कर्मचारियों की स्थिति को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही पर्याप्त कर्मचारी मिलेंगे।- निरंजन शर्मा, महाप्रबंधक राज्य परिवहन रेवाड़ी डिपो।
पद नाम-- स्वीकृत पद-- -भरे हुए पद-- -रिक्त पद
उपनिरीक्षक
30
-- 7-- -
23
निरीक्षक
20--
5-- -
15
मुख्य निरीक्षक
1-- -
0-- -
1
स्टेशन सुपरवाइजर
2-- -
0-- -
2
डीजल पंप लिपिक
3--
0-- -
3
सहायक कैशियर
2--
0-- -
2
कैशियर
2--
0-- -
2
स्टोर कीपर
3-- -
0--
3
टीटीओपी 6-- -
2-- -
4
हेड विद्युतकार 1-- -
0-- -
1
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डिपो में विभिन्न श्रेणियों के कुल 221 स्वीकृत पदों में से 120 पद रिक्त हैं। आधे से अधिक पदों पर कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर तैनाती नहीं होने से जिम्मेदारों को भी व्यवस्थाएं बनाने में परेशानी उठानी पड़ रही है।
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सबसे अधिक कमी निरीक्षण और पर्यवेक्षण से जुड़े पदों पर है। उपनिरीक्षक के स्वीकृत 30 पदों में 7 भरे हैं, जबकि 23 पद खाली हैं। निरीक्षक के 20 में से पांच पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं और 15 रिक्त हैं।
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मुख्य निरीक्षक का एकमात्र पद भी रिक्त है। ऐसे में नियमित बिना टिकट यात्रियों की जांच नहीं होने से डिपो की आय पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। वहीं, स्टेशन सुपरवाइजर के दोनों पद और डीजल पंप लिपिक के तीनों पद रिक्त हैं। सहायक कैशियर के दो, कैशियर के दो और स्टोर कीपर के तीन पद भी खाली हैं।
तकनीकी स्टाफ की स्थिति भी चिंताजनक
तकनीकी स्टाफ की स्थिति भी चिंताजनक है। तीन स्वीकृत हेड मैकेनिक पदों में एक, छह टीवीएफ पदों में चार और हेड इलेक्ट्रीशियन का एक पद रिक्त है। तकनीकी कर्मचारियों की कमी का असर बसों की समय पर मरम्मत और फिटनेस व्यवस्था पर पड़ सकता है। इससे बसों को कार्यशाला में अधिक समय तक खड़ा रखना पड़ सकता है और उपलब्ध बसों का संचालन प्रभावित हो सकता है।
37 हेल्परों में 18 पद रिक्त
चतुर्थ श्रेणी के पदों में भी स्थिति बेहतर नहीं है। दस्तावेज के अनुसार 37 स्वीकृत हेल्पर पदों में 19 नियमित कर्मचारी हैं और 18 पद रिक्त हैं। चौकीदार के 15 पदों पर नियमित कर्मचारी नहीं हैं। एचआरएएन के बाद भी पांच पद रिक्त दर्शाए गए हैं। स्टोरमैन के 14 पदों में केवल तीन नियमित कर्मचारी हैं और समायोजन के बाद 11 पद रिक्त हैं। माली के चारों, स्वीपर के 27 में से 22 तथा वाटर कैरियर के तीनों पदों में भी नियमित कर्मचारियों की कमी दर्ज है।
यह काम हो रहे हैं प्रभावित
कर्मचारियों की कमी का असर केवल विभागीय कामकाज तक सीमित नहीं है। पर्याप्त चालक-परिचालक और तकनीकी एवं सहायक स्टाफ के अभाव में बसों की नियमित जांच, मरम्मत, सफाई, समयबद्ध संचालन और यात्रियों को बेहतर सेवा देना किसी चुनौती से कम नहीं है। कई बार कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ता है, जिससे काम का दबाव बढ़ता है। वहीं, बसों के समय पर नहीं चलने, खराब बसों के कारण फेरे प्रभावित होने और व्यवस्था संबंधी परेशानियों का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसे में डिपो की स्वीकृत पदों के मुकाबले रिक्तियों को भरना जरूरी है, ताकि बस संचालन सुचारु हो और यात्रियों को समय पर सुरक्षित एवं बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।
वर्जन:
परिवहन विभाग की ओर से ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी शुरू की गई है। इससे कर्मचारियों के रिक्त पदों पर नियुक्ति की जा सकेगी। कर्मचारियों की स्थिति को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही पर्याप्त कर्मचारी मिलेंगे।- निरंजन शर्मा, महाप्रबंधक राज्य परिवहन रेवाड़ी डिपो।
पद नाम
उपनिरीक्षक
30
23
निरीक्षक
20
5
15
मुख्य निरीक्षक
1
0
1
स्टेशन सुपरवाइजर
2
0
2
डीजल पंप लिपिक
3
0
3
सहायक कैशियर
2
0
2
कैशियर
2
0
2
स्टोर कीपर
3
0
3
टीटीओपी 6
2
4
हेड विद्युतकार 1
0
1