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23 साल की उम्र में रचा था इतिहास, छोटे से गांव से ओलंपिक तक साक्षी मलिक का सफर
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 04 Sep 2017 09:16 AM IST
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साक्षी मलिक की शादी
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23 साल की उम्र में सिर्फ 10 सेकेंड में ही एक ऐसा करनामा कर दिया था कि इतिहास बन गया। जानिए एक गांव से निकलकर ओलंपिक तक कैसे पहुंची साक्षी मलिक।
ओलंपियन पहलवान साक्षी मलिक
3 सितंबर यानी आज साक्षी मलिक का बर्थडे है। 1992 में जन्मीं साक्षी ने 12 साल की उम्र में कुश्ती शुरु कर दी थी। ओलंपिक में खेलते समय साक्षी की उम्र 23 साल सात माह की थी। साक्षी मलिक के नाम पहले भी एक ऐसी उपलब्धि है, जो शायद ही किसी पहलवान के नाम होती है। साक्षी ने वर्ष 2007 में सब जूनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। इसलिए उसे सीनियर वर्ग में खेलने की अनुमति मिल गई थी। तब से वह सीनियर पहलवानों के साथ खेलने लगी थीं।
पहलवान साक्षी मलिक
साक्षी मलिक के पहलवान बनने के पीछे एक खास वजह रही। उसने पहलवान बनने का सपना केवल इसलिए देखा कि उसे पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी थी। 15 साल पहले केवल ड्रेस के लिए कुश्ती खेलने वाली साक्षी इतनी ऊंचाई तक पहुंचेगी, यह कभी परिवार वालों ने भी नहीं सोचा होगा। बेटी को पहलवान बनाने में परिवार वाले थोड़ा हिचकते जरूर हैं, लेकिन साक्षी मलिक ने अपनी मां सुदेश के सामने खेलने की इच्छा जताई तो वे उसे लेकर 15 साल पहले छोटूराम स्टेडियम में पहुंच गईं।
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ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान साक्षी मलिक
वहां उसे जिम्नास्टिक खेलने के लिए कहा गया, लेकिन उसने साफ इंकार कर दिया। फिर एथलीट व अन्य कई खेलों के खिलाड़ियों को दिखाया गया और सबसे आखिर में साक्षी को रेसलिंग हाल में लेकर पहुंची। वहां साक्षी को पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी तो उसने कुश्ती खेलने की इच्छा जताई। साक्षी की मां सुदेश ने बताया कि उस समय साक्षी को पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी थी और उसने कहा था कि यह ड्रेस अच्छी है, इसलिए वह भी कुश्ती लड़ेगी।
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ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान साक्षी मलिक
सुदेश ने बताया कि उस समय मुझे लगा था कि बेटी की इच्छा है तो खेलने देते हैं, जब तक मन होगा खेलती रहेगी। फिर मैंने एक दिन साक्षी से कहा कि वह कोई भी काम करे, पर मेहनत से करे। चाहे पढ़ाई हो या कुश्ती। शायद उस दिन से साक्षी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसके बाद साक्षी ने बहुत छोटी उम्र में सब जूनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीता। उस समय परिवार को भी यह महसूस होने लगा कि उनकी बेटी ने सही खेल चुना है।