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'सभी 9 बच्चों की मौत तय थी, तभी तो एक हादसे में बच गए थे, पर दूसरा जान ले गया'

Fri, 10 Nov 2017 09:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा(पंजाब)
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा(पंजाब) Updated Fri, 10 Nov 2017 09:01 AM IST
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nine students killed in bathinda highway collision
बठिंडा सड़क हादसा
मौत का आना तय हो तो चाहे कुछ हो, शिकार तक पहुंचने का रास्ता वह तलाश ही लेती है। तभी तो ब​ठिंडा में मारे गए बच्चे, एक एक्सीडेंट में बच गए थे, लेकिन दूसरे में मारे गए।
nine students killed in bathinda highway collision
बठिंडा सड़क हादसा
बात अजीब सी है, लेकिन सच है। धुंध के कारण बठिंडा नेशनल हाइवे पर बुधवार सुबह भाईका कंपनी की प्राइवेट बस रामपुरा से बठिंडा आ रही थी कि सामने से आ रही पीआरटीसी की बस के साथ उसकी टक्कर हो गई। हादसे के बाद प्राइवेट बस की सवारियां ड्राइवर उतर गईं। इनमें अधिकांश स्टूडेंट थे। सरकारी बस की सवारियां भी नीचे उतरीं। फिर वे सभी सड़क के किनारे खडे़ होकर दूसरी बस का इंतजार कर रहे थे।
nine students killed in bathinda highway collision
बठिंडा सड़क हादसा
कुछ ही मिनट हुए थे कि दूसरी ओर से आ रहे सीमेंट से लदे टिप्पर ने उन्हें रौंद दिया, क्योंकि ड्राइवर पहले हुए हादसे को देखना चाहता था। इसके चलते उसका बैलेंस बिगड़ गया और सड़क किनारे खड़े लोगों पर टिप्पर चढ़ा दिया। हादसे में 9 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और शव ऐसे कुचले गए कि टुकड़ों में बिखर गए। हादसे के बाद चालक मौके पर टिप्पर छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने टिप्पर चालक के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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nine students killed in bathinda highway collision
Bathinda Accident
मरने वालों में विनोद मित्तल(18), खुशबीर कौर (20), शिखा बांसल (17), जसप्रीत कौर(18) व नैंसी (19) के अलावा बठिंडा फूड सप्लाई विभाग में तैनात रामपुरा फूल निवासी लवप्रीत कौर के अलावा भुच्चो मंडी के ईश्वर कुमार व गांव लेहरा खाना की मनप्रीत कौर (18)रामपुरा फूल के रहने वाले थे। रफी मोहमद (20) निवासी निवासी दयालपुरा मिर्जा की भी हादसे में मौत हुई। सभी डीएवी और राजिंदरा कॉलेज के विद्यार्थी थे।
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Bathinda Accident
सवेरे हादसा हुआ और पोस्टमार्टम के बाद शाम को शव घर पहुंचे। शाम को ही सभी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। बच्चों को अंतिम विदाई देने के लिए पूरी रामपुरा मंडी के लोग उमड़ पड़े और नम आंखों से अंतिम विदाई दी। माहौल इतना गमगीन था कि हर आंख रो पड़ी। पूरे गांव में किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला, कोहराम मचा था। मरने वालों में कोई डॉक्टर बनना चाहता था, तो कोई विदेश में जाकर नौकरी करना चाहता था।
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