फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Navratri 2020: आज से होंगे मां काली के दर्शन, पंडावों से जुड़ी है मान्यता, यहां पूरी होती हर मुराद

Sat, 17 Oct 2020 12:09 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज, कालका (हरियाणा)
संवाद न्यूज, कालका (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sat, 17 Oct 2020 12:09 AM IST
विज्ञापन
Navratri 2020: Maa Kali temple is decorated in a grand way at Kalka
माता काली मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

प्राचीन काली माता मंदिर को नवरात्र के मद्देनजर भव्य तरीके से सजाया गया है। पहले नवरात्र शनिवार से श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए सुबह से ही मंदिर में आने लगेंगे। इसके लिए मंदिर प्रबंधन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मंदिर सचिव पृथ्वी मित्तल का कहना है कि इस बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने के बाद ही श्रद्धालु माता के दर्शन कर सकेंगे। देखें तस्वीरें...

Trending Videos
Navratri 2020: Maa Kali temple is decorated in a grand way at Kalka
माता काली मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

रजिस्ट्रेशन करने के बाद 11 हजार श्रद्धालुओं को रात दस बजे तक माता के दर्शन हो सकेंगे। जानकारों का कहना है कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, काली माता मंदिर के नाम पर ही शहर का नाम कालका पड़ा था। मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। देश से ही नहीं अपितु विदेश से भी श्रद्धालु माता के दरबार में नतमस्तक होने आते हैं। 

Navratri 2020: Maa Kali temple is decorated in a grand way at Kalka
माता काली मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

मंदिर की यह है मान्यता 
जानकारों के अनुसार, सतयुग में महिषासुर, चंड-मुंड, शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज आदि राक्षसों का उपद्रव बढ़ गया था। देवता भी डरकर कंदराओं में छिपे थे। एक दिन सभी देवताओं ने आदिशक्ति श्री जगदंबा मातेश्वरी की स्तुति की। प्रसन्न होकर माता एक बालक के रूप में प्रकट हुईं। देवताओं का दुख सुनकर माता ने अपने स्वरूप को विस्तृत किया। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Navratri 2020: Maa Kali temple is decorated in a grand way at Kalka
माता काली मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

उनके हजारों हाथ-पैर थे। सभी देवताओं ने आदिशक्ति को अपना एक-एक शस्त्र दिया। विष्णु ने चक्र, शिव ने त्रिशूल, ब्रह्मा ने कमंडल, इंद्र ने वज्र, शेषनाग ने शेषफांस, यमराज ने यमफांस आदि शस्त्र माता को अर्पण किए। इसके बाद माता जगदंबा रणभूमि में उतरीं और महिषासुर सहित सभी दैत्यों का संहार कर कालका की भूमि पर स्थित हुईं, जो कालांतर में कालका में काली माता के नाम से प्रसिद्ध हुई।

विज्ञापन
Navratri 2020: Maa Kali temple is decorated in a grand way at Kalka
माता काली मंदिर। - फोटो : फाइल फोटो

पांडव काल से भी जुड़ी हैं धारणाएं 
धारणा है कि द्वापर युग में पांडवों को 12 वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास हुआ। उस दौरान वह विराट नगर में 12 वर्ष तक रहे। उस समय केवट राजा के राज्य में गाय की बहुत सेवा की जाती थी। वहीं एक श्यामा नामक गाय रोजाना अपने दूध से माता की पिंडी का अभिषेक करती थी। यह करिश्मा देख पांडव आश्चर्यचकित रह गए और पांडवों ने इसी स्थान पर मंदिर की स्थापना की।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed