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लोग हंसते थे, ताने मारते थे...पर बेटी ने इतिहास रचकर दिया करारा जवाब, जानिए कौन?
ब्यूरो/अमर उजाला, तरनतारन(अमृतसर)
Updated Mon, 12 Mar 2018 08:44 PM IST
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पहलवान नवजोत कौर
लोग ताने मारते थे, हंसते थे। लेकिन बहादुर बेटी का हौंसला डगमगाया नहीं, बल्कि उसने ऐसा काम कर दिखाया कि लोगों के मुंह बंद हो गए, जानिए कौन है?
पहलवान नवजोत कौर
हम बात कर रहे हैं, पहलवान नवजोत कौर की। नवजोत ने किर्गिस्तान में चल रही सीनियर एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में 65 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। नवजोत ने फाइनल मुकाबले में जापानी पहलवान मीयू इमाई को 9-1 से पराजित किया और अपनी पुरानी हार का बदला भी चुका लिया। इस उपलब्धि के साथ ही एशिया में स्वर्ण पदक जीतने वाली नवजोत पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं।
पहलवान नवजोत कौर
नवजोत की ऐतिहासिक उपलब्धि पर तरनतारन के गांव बागड़िया में उसके पैतृक घर गांव वासियों का बधाई देने के लिए तांता लगा हुआ है। अपनी बेटी की ऐतिहासिक जीत पर पिता सुखचैन सिंह और माता ज्ञान कौर सहित नवजोत कौर की बड़ी बहन नवजीत कौर जो कि खुद एक रेसलर रह चुकी हैं। मिठाई बांटकर लोगों का मुंह मीठा करवा रही है। नवजोत कौर के परिजनों को उसकी मेहनत लगन और कुश्ती के प्रति निष्ठा पर गर्व है।
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पहलवान नवजोत कौर
नवजोत कौर की माता ज्ञान कौर ने बताया कि बचपन से ही रेसलिंग का शौक रखने वाली नवजोत कौर ने छठी कक्षा से ही कुश्ती खेल रही है और आज देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। नवजोत कौर की बहन नवजीत कौर भी पहलवान हैं। नवजीत कौर की प्रेरणा से ही नवजोत ने खेलना शुरू किया था। शुरू में नवजोत इस खेल को पसंद नहीं करती थीं, लेकिन जब उसने पहली बार गोल्ड मेडल जीता तो फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा है।
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पहलवान नवजोत कौर
नवजोत कौर की मां बताती हैं कि नवजोत के लिए चैम्पियन बनने की यह राह आसान नहीं थी। बेटी को कुश्ती करते देख पिता रेसलर सुखचैन सिंह को कई बार गांव के लोग ही ताने मारते थे। नवजोत साइकिल पर रेसलिंग की कोचिंग के लिए जाती थी, लेकिन लोग हंसते थे और ताना मारते थे कि लड़कियां साइकिल नहीं चलाती, लेकिन पिता सुखचैन ने सभी को अनसुना किया और आज जब वह एक मुकाम हासिल कर चुकी है तो सभी के मुंह बंद हो गए।