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16 साल की उम्र में कैंसर ने छीन लिए थे इनके पैर, देखिए फिर भी जिंदा है जज्बा

Wed, 22 Mar 2017 09:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब) Updated Wed, 22 Mar 2017 09:58 AM IST
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Muscle On Wheels: Story of India's first wheelchair bound bodybuilder anand arnold
दिव्यांग बॉडी बिल्डर आनंद अर्नोल्ड
16 साल की उम्र में कैंसर ने इस शख्स के पैर छीन लिए थे, लेकिन हिम्मत नहीं छोड़ी। कुछ कर गुजरने के जज्बे ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचा दिया।
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दिव्यांग बॉडी बिल्डर आनंद अर्नोल्ड
ये हैं 12 बार मिस्टर पंजाब, 3 बार मिस्टर इंडिया और 1 बार मिस्टर वर्ल्ड का खिताब जीत चुके आनंद अर्नोल्ड। इन्होंने हाल ही में पानीपत बॉडी बिल्डिंग एसो. एंड फिगर फिट की ओर से 36 वीं मिस्टर नार्थ इंडिया सीनियर, जूनियर, हैंडीकैप बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में बॉडी बिल्डरों ने जौहर दिखाए। दिव्यांगों कैटेगरी में पंजाब के आनंद आर्नोल्ड विनर बने।
Muscle On Wheels: Story of India's first wheelchair bound bodybuilder anand arnold
दिव्यांग बॉडी बिल्डर आनंद अर्नोल्ड
पंजाब के लुधियाना निवासी इस युवक के सपनों को 13 साल की उम्र में मिस्टर गोल्डन लुधियाना के खिताब ने पंख लगा दिए, लेकिन 16 साल की उम्र में कैंसर की चपेट में आ गए थे। जिसके बाद उनके दोनों पैर खराब हो गए थे और कैंसर ने उन्हें बेड पर लेटे रहने को मजबूर कर दिया। बेड पर तीन साल तक उन्होंने इस उम्मीद से गुजारे कि कुछ करके दिखाना है। इस सोच ने हौसला बंधाया और बॉडी बिल्डिंग शुरू की दी।
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Muscle On Wheels: Story of India's first wheelchair bound bodybuilder anand arnold
दिव्यांग बॉडी बिल्डर आनंद अर्नोल्ड
आनंद ने बताया कि अर्नोल्ड परिवार में जन्म लेने पर मेरा नाम बड़ी उम्मीद से आनंद अर्नोल्ड रखा गया। कई फेमिली मेंबर खिलाड़ी थे, लिहाजा इविंग क्रिश्चियन स्कूल में पढ़ते हुए मैंने भी बॉडी बिल्डर बन मिस्टर लुधियाना का खिताब जीता। मगर 7वीं में पहुंचा तो मेरी लाइफ में टर्निंग प्वाइंट आया। स्पाइनल कॉर्ड कैंसर होने से कमर से नीचे का हिस्सा पैरालाइज हो गया।

 
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6 फुट का आदमी मारकर ढाई फीट के सूटकेस में पैक कर दिया
मौत से बचने के लिए ऑपरेशन कराया तो तीन साल बिस्तर पर गुजारने पड़े। एक-एक दिन पहाड़ की तरह गुजरा। आनंद ने बताया कि उस दौरान मेरी मम्मी इंदिरा अर्नोल्ड ने किसी मासूम बच्चे की तरह मुझे पाला। जीने का हौसला जागा और बेरंग हो चुकी जिंदगी पटरी पर लौटी। पढ़ाई तो छूटी मगर 16 साल की उम्र में फिर से वॉकर के सहारे कसरत शुरू की।

 
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