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मोदी के मास्टर स्ट्रोक से कोमा में पहुंचा ये उद्योग, पीक सीजन में ही छाया सन्नाटा
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Sat, 19 Nov 2016 11:03 PM IST
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देश से काला धन एवं भ्रष्टाचार खत्म करने के पीएम नरेंद्र मोदी के मास्टर स्ट्रोक से उद्योग जगत में पीक सीजन के बावजूद सन्नाटा है। उद्यमियों का कहना है कि पुराने आर्डर कैंसल हो गए हैं, नए आर्डर मिल नहीं रहे हैं और पेमेंट का सर्किल भी रुक गया है। नब्बे फीसदी तक कारोबार हाथ से फिसल चुका है। आगे क्या होगा, समझ नहीं आ रहा है। सीजन के बावजूद इकाईयों में उत्पादन ठप हो गया है।
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- फोटो : अमर उजाला
उद्यमियों को डर है कि यदि शीघ्र ही करेंसी संकट न टला तो उद्यमी दिवालिया हो जाएंगे। ऐसे में सरकार को उद्योगों की मदद को शीघ्र ही ठोस उपाय करने होंगे। लुधियाना में होजरी उद्योग से जुड़ी करीब बारह हजार इकाईयां हैं। सितंबर से लेकर दिसंबर तक इस उद्योग का पीक सीजन रहता है। अधिकतर इकाईयां माइक्रो एवं स्मॉल सेक्टर में स्थित हैं।
वुलन उद्योग में करीब आठ हजार करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा है।
वुलन उद्योग में करीब आठ हजार करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा है।
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साठ फीसदी से अधिक कारोबार कैश में ही हो रहा है। पंजाब के अलावा हरियाणा, हिमाचल, जम्मू कश्मीर, यूपी, दिल्ली समेत आसपास के इलाकों से दुकानदार ज्यादातर माल कैश में ही खरीदते हैं, लेकिन नोटबंदी के बाद से नब्बे फीसदी कारोबार खत्म हो गया है। निटवियर, अपैरल मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ लुधियाना के प्रेसिडेंट सुदर्शन जैन का कहना है कि पिछले दो तीन साल से मौसम की बेरुखी के कारण कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रहा था, लेकिन इस बार सर्दी भी वक्त से शुरू हो गई।
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- फोटो : social media
अच्छे मानसून के बाद बेहतर कारोबार की उम्मीद थी, आठ नवंबर तक सब कुछ ठीक चल रहा था। नोटबंदी का एलान होते ही बाजार में सन्नाटा छा गया। रिटेल मार्केट में भी बिक्री थम गई। इन हालात में उद्यमी कर्जाई हो रहे हैं, उद्यमी शीघ्र ही दिवालिया हो सकते हैं। निट्स एंड फैब होजरी एसोसिएशन के प्रधान विपिन विनायक कहते हैं कि पीक टाइम में भी मजबूरन लेबर की छंटनी करनी पड़ रही है। बेरोजगारी का संकट अलग से मंडरा रहा है। इसकी पूर्ति आने वाले दो साल तक भी होनी मुश्किल हैं। ऐसे में उद्यमियों के लिए आत्महत्या करने तक की नौबत आ सकती है। उन्होंने कहा कि अब उद्योग केवल भगवान भरोसे है।
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लुधियाना यार्न डीलर एसोसिएशन के प्रधान राधे श्याम आहूजा कहते हैं कि नोटबंदी के कारण यार्न कारोबार भी 99 फीसदी तक खत्म हो गया है। माल का कोई उठाव नहीं है। फिर से कारोबार को ए, बी, सी से शुरू करना होगा, लेकिन तब तक कारोबारी कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद पूरा आर्थिक सिस्टम ही चरमरा गया है।