मेरी गाड़ी में 23 लोग सवार थे। छह लोगों ने मेरे देखते ही दम तोड़ दिया। मेरे भी मौत सामने थी पर भगवान ने मुझे बचा लिया। मैने कर्ज भी चुका दिया।
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डबवाली में सड़क हादसे में मारे गए मोगा के 6 लोग
ये बयान थे उस चश्मदीद के, जो धुंध के कारण हुए दर्दनाक हादसे में जिंदा बच निकला। हादसा, सिरसा में हुआ। सुबह करीब साढ़े सात बजे दृश्यता कम होने की वजह से टेंपो (टाटा एस) की सामने से आ रहे ट्रक से टक्कर हो गई। इसी दौरान पीछे से आ रही बस ने भी टेंपो को टक्कर मार दी। तीनों वाहनों को भिड़ने से टेंपो में सवार तीन महिलाओं सहित छह लोगों की मौत हो गई जबकि बारह महिलाएं व दो बच्चों समेत सोलह लोग घायल हो गए।
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डबवाली में सड़क हादसे में मारे गए मोगा के 6 लोग
मेरे सहित टाटा एस में 23 लोग सवार थे। मैं पीछे बैठा हुआ था। दो माह पथराला में गुजारने के बाद किराए पर टाटा एस करके गांव किंगरा जा रहे थे। इतनी ज्यादा स्मॉग थी कि कुछ नजर नहीं आ रहा था। गांव सांवतखेड़ा क्रॉस करने के बाद सामने से आए ट्रक ने हमारी गाड़ी में टक्कर मार दी। पीछे चल रही बस की टक्कर लगने से गाड़ी पलट गई। किसी को कुछ समझ नहीं आया। मेरे सिवा सभी बाईस लोग बुरी तरह से घायल हो गए। मैंने घायलों को बाहर निकालने का प्रयास किया।
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बस से कुछ यात्री उतरकर मेरे पास आए। मेरी सहायता करने लगे। कई वाहन वहां से क्रॉस कर गए, किसी ने सहायता करने की कोशिश नहीं की। इतनी देर में सिरसा साइड से एक पिकअप गाड़ी आई। जिसमें 25 से 30 लोग सवार थे। उन्होंने सहायता शुरू की। घायलों को बाहर निकाला। अपनी गाड़ी में डालकर डबवाली के सिविल अस्पताल में पहुंचाया। यह कहना है गांव फुल्लेवाला निवासी सेवक सिंह का। वह भी दुर्घटना का शिकार होने वाली टाटा एस में सवार था। हादसे में उसे खरोंच तक नहीं आई।
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सोलह घायलों की चीख-पुकार से अस्पताल दहल गया। निजी चिकित्सक एसएस गुलाटी, डॉ. रमेश, डॉ. मुकेश गोयल, डॉ. विवेक करीर घायलों की सहायता के लिए अस्पताल में पहुंचे। अस्पताल में पहले से दाखिल मरीज खुद का दर्द भूलकर घायलों की सेवा में जुट गए। इमरजेंसी रूम छोटा पड़ा गया तो राधा स्वामी सत्संग घर से संबंधित श्रद्धालुओं ने आंगन में ही बिस्तर लगा दिए। जिस पर चिकित्सकों ने उनका उपचार किया। घायलों को सिरसा रेफर कर दिया गया।