मां पहले नया मकान बनाएंगे और उसके बाद ही शादी के लिए बातचीत करना। मैं जल्द ही छुट्टी लेकर दीपावली पर घर आऊंगा। तीनों बहनों को भी भैयादूज के अवसर पर घर बुला लेना, उनसे तिलक करवाकर ही नए मकान की नींव रखेंगे....यह आखिरी लफ्ज थे, जो आईटीबीपी जवान दीपक ने फोन पर अपनी मां से कहे।
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आईटीबीपी जवान शहीद दीपक का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
नियति को कुछ और ही मंजूर था। मां को फोन पर कही ये सारी बातें सिर्फ यादें बनकर रह जाएंगी, इसका किसी को भी अंदाजा नहीं था। दीपावली की रात करीब डेढ़ बजे फोन आया कि आपका बेटा शहीद हो गया तो पूरा परिवार शोक में डूब गया।
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आईटीबीपी जवान शहीद दीपक का अंतिम संस्कार
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दीपावली की रात छत्तीसगढ़ के बसैली में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में गोली लगने से शहीद हुए खातीवास निवासी सिपाही दीपक का तिरंगे में लिपटा शव जैसे ही गांव पहुंचा, माहौल गमगीन हो गया। सबसे खराब हालत तो शहीद की मां शकुंतला की थी। उनकी बहनें और दोस्त बेसुध हो गए।
शहीद दीपक के शव के अंतिम दर्शन किए गए। रीति-रिवाज के बाद शव को गांव के अंत्येष्टि स्थल पर ले जाकर राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन कर दिया गया। शहीद के चचेरे भाई ने शव को मुखाग्नि दी।
आईटीबीपी के इंस्पेक्टर केपी आर नय्यर ने बताया कि दीपक उनकी यूनिट नंबर 27 का सिपाही था। करीब डेढ़ महीने पहले ही दीपक का तबादला केरल से छत्तीसगढ़ हुआ था। छत्तीसगढ़ के बसैली में दीपक दीपावली की रात कैंप के बाहर ड्यूटी पर तैनात था। रात करीब साढ़े दस बजे कैंप में गोली की आवाज सुनी।