कैंसर और डायबिटीज को साइलेंट किलर कहा जाता है। क्या आप ऐसी ही एक और बीमारी के बारे में जानते हैं, जो जानलेवा हो सकती है?
अक्सर सुना होगा कि बाथरूम में गिरने से कूल्हे की हड्डी टूट गई। या फिर उम्रदराज लोगों को झुककर चलते देखा होगा। यह दोनों ही बातें आस्टियोपोरोसिस की निशानी होती हैं। आस्टियोपोरोसिस का सीधे शब्दों में मतलब हड्डियों का कमजोर होना होता है। पीजीआई के डॉक्टरों ने अपने अनुभवों के माध्यम से बताया है कि 100 में से 20-25 लोग इस भयंकर बीमारी से पीड़ित हैं।
इस बीमारी को डायबिटीज, हार्ट व ब्रेन स्ट्रोक से कम न आंके। पीजीआई ने अपनी एक स्टडी में ये भी पाया है कि कूल्हे की हड्डी टूटने के बाद 30 प्रतिशत लोगों की एक साल में मौत हो जाती है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह बीमारी कितनी खतरनाक है, लेकिन डॉक्टरों का दावा है कि यदि स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें तो इससे आसानी से बच सकते हैं।
पीजीआई के इंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉक्टरों के मुताबिक हड्डियों में दर्द इस बीमारी की शुरुआत होती है। 40-45 साल में इसका खतरा बढ़ने लगता है। महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी से मीनोपॉज के बाद यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। यह हार्मोन महिलाओं को हड्डियों के साथ-साथ दिल की समस्या से भी बचाता है। एस्ट्रोजन की कमी होते ही हड्डियां अंदर से कमजोर होने लगती हैं और भुरभुरी बन जाती हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, धीरे-धीरे हड्डियों में दर्द बढ़ने लगता है। उसके बाद जरा सी चोट लगने पर हड्डियों में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। कई बार कम उम्र की महिलाओं में ये समस्या देखने को मिलती है। इसकी वजह पीरियड्स का जल्दी खत्म होना है। विटामिन और कैल्शियम की कमी का होना। फिजिकली ज्यादा एक्टिव न होना। डायबिटीज या थायराइड का होना। फास्ट फूड व कोल्डड्रिंक का इस्तेमाल अधिक करना