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'मेरी बेटी डॉक्टर बनना चाहती थी, बहुत बहादुर थी...दरिंदों से आखिरी सांस तक लड़ी'

Thu, 18 Jan 2018 09:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद/कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद/कुरुक्षेत्र(हरियाणा) Updated Thu, 18 Jan 2018 09:32 AM IST
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kurukshetra gangrape, jind gangrape victim mother interview
जींद गैंगरेप
मेरी बेटी डॉक्टर बनना चाहती थी। बहुत बहादुर थी, तभी तो वहशी दरिंदों से आखिरी सांस तक लड़ी। लेकिन हार गई, कहते-कहते मां बेसुध हो गई।
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Jind Rape and Murder
दरिंदों ने झांसा निवासी जिस लाडली को दरिंदों ने भयानक मौत दी है, वह देश की साक्षर महिलाओं के आंकड़ों में सुधार करते हुए डॉक्टर बनना चाहती थी। यह जानकारी उसकी मां ने अमर उजाला के रिपोर्टर को दी। इस दौरान दरिंदगी का शिकार हुई मासूम की मां रो-रोकर बोली कि साहब हमें पैसा नहीं, न्याय चाहिए। जिन दरिंदों ने मेरी बेटी का ये हश्र किया, उन पर ऐसी कार्रवाई करो कि वो एक सबक बने।
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मेरी बेटी डाक्टर बनना चाहती थी। दोपहर तक स्कूल में पढ़ती थी और शाम को ट्यूशन जाती थी। आठवीं में उसके 95 प्रतिशत अंक थे। अब कुछ नहीं रहा। उसकी ये कॉपियां रह गई हैं। देख लो इन्हें, कितना सुंदर लिखती थी मेरी बेटी। लेकिन, भाग्य का लेखा इतना बुरा होगा, कभी सोचा भी नहीं था। पीड़िता की मां ने भर्राए गले से बताया कि उसने अपनी सामाजिक विज्ञान की कॉपी में अंतिम पाठ चार लिखा था। इसमें जाति, धर्म और लैंगिक मसलों पर सवाल जवाब लिखे हैं।
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अमर उजाला की टीम मंगलवार को गांव झांसा की गलियों में पहुंची तो उस गल में सन्नाटा मिला जहां पीड़िता का घर है। उसके आपसपास गांव के दो प्राइवेट स्कूल हैं। इनमें से एक में पीड़िता पढ़ती थी। उस स्कूल पर अभी ताला जड़ा है, जहां पीड़ित छात्रा शाम को कोचिंग लेने जाती थी। स्कूल के चंद कदम की दूरी छात्रा का घर है। इसी स्कूल से चंद कदम की दूरी पर ग्राम सचिवालय है।
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पीड़िता के घर में मंगलवार को परिवार के सिर्फ एक-दो पुरुषों और अधिकांश महिलाएं ही मौजूद थीं। क्योंकि, परिवार के अन्य सदस्य और कुछ रिश्तेदार छात्रा के अस्थि कलश को लेकर हरिद्वार गए हुए थे। इस दौरान मृतका की मां से बात की तो वह लाडली की यादों जुबां पर लाते समय फूट-फूट कर रो पड़ी। मां इस दौरान लोगों को बेटी की कॉपी दिखाती रहीं। उस कापी पर जब नजर डाली तो आखिरी पाठ चार लिखा हुआ था। यह पाठ ही इस निर्भया का आखिरी पाठ बन गया।
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