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Kisan Andolan: बरसात भी नहीं डिगा पा रही किसानों के हाैसले, कहा-मिट्टी और पानी से रोज का वास्ता, इनसे कैसा डर

Thu, 05 Sep 2024 08:50 AM IST
निवेदिता वर्मा नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 05 Sep 2024 08:50 AM IST
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Kisan Andolan update news in chandigarh
चंडीगढ़ में किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ में किसानों का धरना जारी है। हालांकि प्रशासन ने उन्हें 4 सितंबर तक की ही मोहलत दी थी लेकिन बुधवार शाम को किसान नेताओं की एडीजीपी जसकरण सिंह के साथ बैठक में कोई हल नहीं निकला। इसलिए आज दोपहर तीन बजे मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ किसान नेताओं की बैठक होगी। इस बैठक में चीफ सेक्रेटेरी, कैबिनेट मंत्री व अलग-अलग विभागों के अधिकारियों मौजूद रहेंगे। ऐसे में अभी किसानों का सेक्टर-34 स्थित मेला ग्राउंड में धरना वीरवार दोपहर तक जारी रहेगा।  


Kisan Andolan update news in chandigarh
चंडीगढ़ में किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
बरसात में ही पहुंचे पंडाल में
बुधवार को हुई बारिश में भी किसानों का हौसला बुलंद रहा। पानी होने के बाद भी पंडाल में समय पर पहुंचे। कपड़े गीले हो गए। लेकिन स्टेज और पंडाल में लोग आए। अपने किसान नेताओं के भाषण सुने। सुबह बारिश के कारण किसान ट्रैक्टर और ट्रालियों में ही अपना लंगर बनाया।
 
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चंडीगढ़ में किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
संघर्षों की है हमारी विरासत
किसानों का कहना है कि हमारी विरासत ही संघर्षों का है। पानी और कीचड़ से ही तो हमारा प्यार है। खेत में जब काम करते हैं तो यही सब हमारे साथ हैं। घर से दूर हैं लेकिन परिवार के लोगों का भी हौसला बुलंद है। पोते और पोतियां भी फोन करने पर नारे लगाते हैं। इससे हम सभी को काफी खुशी होती है। घर में हर रोज बाते भी होती है। देर से आने पर जब ग्राउंड में जगह नहीं मिली तो सड़क के किनारे ही बसेरा बना लिया। लंगर बनाते हुए भी जब स्टेज से नारे लगते हैं तो अपने अपने शिवर में बैठे किसान नारे का जवाब देते हैं।
 
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चंडीगढ़ में किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
मेरे पोते पोतियां भी फोन पर नारे लगाते हैं...
सुरजीत सिंह ने बताया कि घर हर रोज बात होती है। मेरे पोते पोतियां नारे लगाते हैं। हम सभी अपने गांव से लंगर का सामान लेकर आए हैं। इसमें आटा, प्याज, लहसुन, टमाटर के अलावा पाउडर वाला दूध लेकर आए हैं। घर से एक दिन का खाना लेकर चले थे। घर के लोग भी हौसला बढ़ाते हैं। 

दिल्ली में चले किसान आंदोलन में रहे हैं...
जगदीश सिंह ने बताया कि वे दिल्ली के किसान आंदोलन में रहे हैं। वहां का अनुभव है। हम सभी अनुशासन में रहते हैं। सभी अपने अपने ट्रैक्टर ट्रालियों में लंगर का सामान रखे हैं। अपना काम खुद करते हैं। हमें चंडीगढ़ आने से पहले बैठकों में सभी बातों को बताया गया है। 
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चंडीगढ़ में किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
हम कीचड़ और पानी से प्यार करते हैं...
रघबीर सिंह कहते हैं कि हम तो पानी और कीचड़ से प्यार करते हैं। खेतों में हमारा रोज इनसे पाला पड़ता है। बारिश होने के बाद हमें कोई परेशानी नहीं हुई। ट्राली में ही लंगर बना। लंगर खाया और खिलाया।  
हम सभी का ध्यान रखते हैं...
सुखदेव सिंह बोले कि हम संघर्षों के वारिस हैं। रात को सतर्क रहते हैं। आंधी आए या तूफान स्टेज समय पर चलता है। हम सभी का ध्यान रखते हैं। हमें यह भी ध्यान रखना है कि कोई गलत व्यक्ति न आए और कोई गड़बड़ी न हो।  
 
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