ब्लू बर्ड झील में बतख में मिले बर्ड फ्लू वायरस के बाद दूसरे दिन कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया गया। पहले दिन चले किलिंग ऑपरेशन के बाद बतख झाड़ियों में छिप गई थी। टीम ने झाड़ियों में छिपी 11 बतख को पकड़कर उन्हें मार दिया और गड्ढे में दबा दिया। इसके अलावा अंबेडकर बस्ती में बचे हुए चार मुर्गे व पालतू पक्षियों को मारा गया। टीम के सदस्य पूरे दिन ऑपरेशन में लगे रहे।
दूसरे दिन भी जारी रहा ऑपरेशन किलिंग, मारे गए झाड़ियों में छिपे 11 और बतख
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पशुपालन विभाग की स्पेशल टीम ने आसपास की बस्तियों अंबेडकर बस्ती, सरकारी हेचरी, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, विकास नगर व झील के चारों ओर दवा का स्प्रे किया है। नोडल ऑफिसर डॉ. एलसी रंगा ने बताया कि एहतियात के तौर पर अंबेडकर बस्ती में सोडियम हाइपोक्लोराइड का स्प्रे का छिड़काव किया गया है। कोई एरिया अगर बच गया है तो उस क्षेत्र में रविवार को छिड़काव होगा।
20 क्विंटल चूने का छिड़काव- विभाग की टीम ने दो दिनों में 20 क्विंटल से ज्यादा चूने का छिड़काव कर दिया। इसके अलावा अन्य दवाइयों का स्प्रे किया। डॉक्टरों ने कहा कि जहां पक्षियों को मारा गया वहां पर स्प्रे किया गया है।
हीरो ऑफ ब्लू बर्ड ऑपरेशन- ऑपरेशन ब्लू बर्ड में नोडल ऑफिसर एल सी रंगा व पशु पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर रविंद्र हुडा हीरो रहे हैं। जैसे ही उन्हें मामले के बारे में सूचना मिली विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तुरंत ऑपरेशन चलाया। मुख्य भूमिका में नोडल ऑफिसर एलसी रंगा ने पूरी प्रक्रिया को फॉलो करते हुए टीम तैयार की।
हर 15 दिन बाद लिए जाएंगे सैंपल- नोडल ऑफिसर ने बताया कि हर 15 दिन बाद पक्षियों के सैंपल लिए जाएंगे। सैंपल रिपोर्ट के आधार पर ऑपरेशन की प्रक्रिया की रणनीति बनाई जाएगी। फिलहाल एक तरह से ऑपरेशन किलिंग पूरा हो चुका है। 10 किलोमीटर एरिया में ये सैंपलिंग होती रहेगी। अधिकारियों ने बताया है कि रविवार को मैपिंग ऑपरेशन चलाया जाएगा। एक किलोमीटर के एरिया में छानबीन की जाएगी कि ऐसा कोई पक्षी तो नहीं जो बर्ड फ्लू से संक्रमित हो। गूगल मैप के सहारे टीम ने पैमाइश की गई है।