मां बहन मर गईं, पिता भी छोड़कर चले गए। बहुत दर्द होता है, किसी को तरस आता तो दो रोटी मिल जाती। 11 साल के मासूम की कहानी कलेजा चीर देगी।
हरियाणा के कैथल के गांव कैलरम का विजय, चेहरा जला हुआ। जख्म भी भरे नहीं, पर सजा भुगत रहा है दो युवकों की दरिंदगी की। 15 साल का भाई अजय ढाबे पर काम करके गुजारा करता है। उसकी देखभाल करता है और अपना भी पेट भरता है। घर में अकेले रहते हैं, पिता मन करता तो आ जाते नहीं तो नहीं। मां और बहन जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद हार मानकर चलीं गईं।
आज से 6 साल पहले दो युवकों ने आंगन में सो रहे परिवार पर तेजाब डाल दिया था। इसमें मां, उसकी 15 साल की बेटी और पांच साल का बेटा बुरी तरह से झुलस गए थे। मां की तीन-चार दिन बाद मौत हो गई थी। जबकि 15 वर्षीय बेटी का करीब चार साल तक इलाज चला, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे में झुलसा 5 साल का बेटा अब 11 साल का हो गया है।
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acid attack
- फोटो : अमर उजाला
कहीं से भी मदद नहीं मिलने के कारण अब वह दो जून की रोटी के लिए मोहताज है। 17 साल का भाई उसकी किसी तरह से देखभाल कर रहा है। शासन से लेकर प्रशासन तक ने इस परिवार की सुध नहीं ली। बताते हैं कि 21 मई 2011 को गांव कैलरम निवासी कृष्ण कुमार की पत्नी परमजीत कौर, 15 वर्षीय पुत्री रेखा और 5 साल का बेटा विजय घर के आंगन में सोये थे।
इसी बीच घर के पीछे से छत पर चढ़े दो युवकों ने तीनों पर एसिड डाल दिया, जिससे तीनों बुरी तरह से झुलस गए। तीनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। बेटी रेखा और पत्नी परमजीत कौर को करनाल रेफर किया गया। करनाल में चार दिन बाद परमजीत कौर की मौत हो गई। रेखा का चार साल तक इलाज चला, लेकिन मदद नहीं मिलने के कारण 19 साल की उम्र में वर्ष 2015 में उसकी भी मौत हो गई।