देश को गोल्ड मेडल दिलाने के बाद आज ये अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बर्तन धोने-भैंस चराने को मजबूर है। जानिए क्यों?
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सरकार ने अनदेखी से नाराज खिलाड़ी अब संभाल रही
कबड्डी के क्षेत्र में देशभर में 2012 से 2016 तक अपना लोहा मनवा चुकी विश्व कप विजेता टीम की सदस्य रहीं रामभतेरी गिल ने सरकार की अनदेखी से नाराज होकर कबड्डी खेल को अलविदा कह दिया।
रामभतेरी अब घर का चौका-चूल्हा संभाल रही हैं। कभी कबड्डी में देश-प्रदेश का नाम रोशन करने वाली रामभतेरी अब पशुओं के लिए चारा काटती हैं, डालती हैं और घर के काम में मां का हाथ बंटाती हैं।
अमर उजाला ने जब कबड्डी खिलाड़ी रामभतेरी से इस नाराजगी की वजह जानना चाहा तो खिलाड़ी और उसके परिजनों ने कहा कि इतनी कामयाबी के बावजूद उसे नौकरी तो मिली नहीं। सरकार ने उसकी उपेक्षा ही की। पिता ने कहा कि अब उसकी शादी तो करवानी ही है, इसलिए घर के कामों में भी उसे पारंगत करना पड़ेगा। रामभतेरी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला के गृहक्षेत्र टोहाना के गांव समैण की निवासी है।
कबड्डी खिलाड़ी रामभतेरी के कोच राजबीर गिल का अरोप है कि सरकार का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा सिर्फ कागजों में है। खेल मंत्री अनिल विज सिर्फ अंबाला जिले के बारे में सोचते हैं। उन्होंने बताया कि एक बार वे रामभतेरी व खिलाड़ियों को लेकर खेल मंत्री अनिल विज से मिलने गए, लेकिन वहां पर उन्हें सिर्फ धक्के मिले।