16 साल और करीब 150 पेशियां, जानिए क्या है रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस और वो चिट्ठी जिसे पत्रकार ने छापा था और जिस वजह से उसकी हत्या हुई, राम रहीम को दोषी करार दिया गया।
बात साल 2002 की है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के नाम एक गुमनाम चिट्ठी आई, जो तीन पेज की थी। ये चिट्ठी एक महिला की ओर से भेजी गई थी। इसमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम की शिकायत की गई। डेरा प्रमुख पर यौन शोषण व दुष्कर्म का आरोप लगाया गया। चिट्ठी में दो अन्य साध्वियों का भी जिक्र था, जिनके साथ प्रताड़ना होने की बात कही गई थी।
चिट्ठी में गुहार लगाते हुए सहायता मांगी गई और कहा गया कि मैं अपना नाम पता लिखूंगी तो मुझे मार दिया जाएगा। किसी एजेंसी से मामले की जांच करवाई जाए और पता लगाया जाए कि कहां क्या चल रहा है। पीएमओ ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सितम्बर 2002 में सीबीआई को इस मामले में जांच के आदेश दिए। सीबीआई ने जांच में आरोपों में सच्चाई पाई और डेरामुखी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।
मामले में सीबीआई ने विशेष अदालत में 31 जुलाई, 2007 को आरोप पत्र दाखिल किया। जिसमें डेरामुखी को जमानत मिल गई, लेकिन मामला चलता रहा। राम रहीम पर केस 2002 में दर्ज हुआ था। साल 2007 में आरोप पत्र दाखिला हुआ। पहली सुनवाई जनवरी 2012 में हुई। सीबीआई की अदालत में पहली सुनवाई अक्तूबर 2013 में हुई। केस में बाबा राम रहीम का ड्राइवर मुख्य गवाह रहा और 200 से ज्यादा सुनवाइयां हुईं।
25 अगस्त 2017 को पंचकूला की सीबीआई कोर्ट के जज जगदीप सिंह ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख को दोषी करार दिया। बाबा को सजा का फैसला 28 अगस्त को हुआ। उसे दो मामलों में बीस साल की सजा सुनाई गई, जिसे भुगतने के लिए इन दिनों वह सुनारिया जेल रोहतक में है। यही चिट्ठी पत्रकार छत्रपति के मर्डर का कारण बनी। छत्रपति ने अपने सांध्य कालीन समाचार पत्र ‘पूरा सच’में इस संबंध में अनाम साध्वी का पत्र प्रकाशित किया था।