शहीद परमजीत सिंह का पार्थिव शरीर जैसे ही घर पहुंचा, परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। अफसरों ने विनती की तब जाकर वे माने।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
नायब सूबेदार परमजीत सिंह का पार्थिव शरीर तरनतारन जिले के गांव वई पुई पहुंच। जैसे ही शव पहुंचा, घर में कोहराम मच गया। परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। वहीं परिजनों ने कह दिया था कि जब तक पूरा शरीर नहीं मिलेगा, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इसके बाद सेना के अफसरों ने उनसे बातचीत की और समझाया।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह को 28 अप्रैल को छुट्टी पर आना था, लेकिन वे नहीं आए। क्योंकि उनके दोस्त को तुरंत छुट्टी चाहिए थी, इसलिए उन्होंने अपनी छुट्टी मई के दूसरे हफ्ते तक के लिए स्थगित कर दी थी। शायद किस्मत को यहीं मंजूर था, पर उस दोस्त को सारी जिंदगी परमजीत सिंह ये जिंदादिली याद रहेगी।
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जवानों के शव के साथ बर्बरता
गांव के सरपंच रंजीत सिंह राणा ने बताया कि परमजीत सिंह 5 महीने पहले घर आया था। उनके पिता उधम सिंह एक किसान हैं और उनके दो भाई भाई चरणजीत सिंह और रंजीत सिंह शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में काम करते हैं। परमजीत के परिवार में तीन बच्चे हैं। परमजीत सिंह की 17 वर्षीय बड़ी बेटी सिमरनदीप कौर मैट्रिक, 13 वर्षीय बेटी खुशदीप कौर और 10 वर्षीय बेटा साहिलदीप सिंह श्री गोइंदवाल साहिब में पढ़ाई करते हैं।
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जवानों के शव के साथ बर्बरता
साल 2000 में भारतीय फौज में भर्ती हुए परमजीत सिंह की शादी गांव लालपुरा निवासी परमजीत कौर के साथ हुई थी। वहीं बेटे की शहादत गर्व करने वाली मां की आंखों में बेटा खोने का दर्द भी है। विलाप कर रही मां जोगिंदर कौर ने कहा कि कल ही परमजीत का फोन आया था, बात करते हुए बोला माएं एत्थे खतरा तां बहुत ऐ, पर तेरा लाल घबराण वाला नहीं। बेटे इतना कहते ही फफक कर पड़ीं।