जम्मू-कश्मीर के पुलवामा क्षेत्र में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में वीरों की धरती के गांव राजगढ़ निवासी सेवा मेडल से सम्मानित हरि सिंह (28) भी शहीद हो गए। वह एक माह पूर्व छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर लौटे थे। हरि सिंह का जन्म 15 अगस्त 1993 को हुआ था। वह वर्ष 2011 में 55-राष्ट्रीय राइफल में भर्ती हुए थे। हरि सिंह चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर के थे।
पत्नी से फोन पर बोला जवान, 40 भाइयों का बदला लेकर जल्द आऊंगा, ऐसे आई शहादत की खबर
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अपने 40 भाइयों की शहादत का बदला लेकर जल्द घर आऊंगा। सोमवार सुबह सेना ने उनके शहादत की सूचना भेज दी। चालीस सीआरपीएफ जवानों की शहादत से शोक में डूबे बावल उपमंडल के ग्रामीणों को जैसे ही हरि सिंह के शहीद होने की खबर मिली सभी की आंखें नम हो गईं। हरि सिंह के चचेरे भाई रणजीत ने बताया कि हरि सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार सुबह हवाई मार्ग से दिल्ली लाया जाएगा। इसके बाद राजगढ़ स्थित आवास पर लाया जाएगा। अंतिम दर्शन के बाद सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पिता भी सेना में थे
शहीद हरि सिंह के पिता अगड़ी सिंह भी सेना में थे। सेवानिवृत्त के बाद उन्होंने बेटे को भी सेना में भर्ती कराने के लिए अभ्यास कराया। अगड़ी सिंह देश सेवा के अलावा समाज सुधार के कार्यों में भी आगे रहते थे।
दस माह पहले बने थे पिता
हरि सिंह का विवाह महेंद्रगढ़ जिले के गांव झगड़ौली निवासी राधा बाई के साथ दो फरवरी वर्ष 2016 में संपन्न हुआ था। 16 अप्रैल 2018 को उनके घर बेटा पैदा हुआ। बेटे का नाम लक्ष्य चौहान है। हरि सिंह कहते थे कि जिस तरह मेरे पिता ने मुझे देश सेवा के लिए तैयार किया, वैसे ही मैं भी अपने बेटे को सेना में अफसर बनाने का प्रयास करूंगा।
बहादुरी के लिए मिला था सेवा मेडल
सेना द्वारा 13 नवंबर 2018 को आतंकवादियों के खिलाफ पुलवामा में लॉन्च किए गए ऑपरेशन बहादुरी में आतंकवादी संगठन लश्कर के दो आतंकवादियों को दबोच कर बहादुरी का परिचय दिया था। हरि सिंह की बहादुरी पर सेना द्वारा दिसंबर माह में उन्हें सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था।
रेवाड़ी में अब तक 150 शहीद
वीरों के खान के नाम से पहचाने जाने वाले जिले रेवाड़ी में अब तक 150 के करीब सैनिक देश सेवा में अपने प्राणों की कुर्बानी दे चुके हैं। जिले के लूखी गांव को सैनिकों के गांव के नाम से जाना जाता है। गांव के हर दूसरे घर में एक युवक सेना में भर्ती होकर देश सेवा में तैनात है।
घर में भोलू नाम से पुकारते थे
स्वभाव से बेहद शरीफ, मिलनसार हरि सिंह को गांव के लोग-दोस्त और परिजन भोलू नाम से पुकारते थे। हंसमुख स्वभाव होने के कारण उनके साथ बिताये पलों को याद कर न केवल उनके दोस्त बल्कि आस पड़ोस के बच्चे भी मायूस नजर आए।
गांव में हरि सिंह की पहचान हर किसी के सुख-दुख में आगे रहने वाले व्यक्ति की थी। जब भी छुट्टी पर आते तो सभी से मिल-जुलकर जाते थे। खेल-कूद खासकर दौड़ना उन्हें ज्यादा पसंद था। मेरे भाई भी उनके साथ ड्यूटी पर तैनात थे। भाई से बात करता तो हरि सिंह से भी बात हो जाती थी। पुलवामा हमले के बाद आतंकियों के खात्मे की बात जुबां पर थी। -दिनेश कुमार, पंच
शहीद हरि सिंह बचपन से मित्र थे। सुबह की सैर साथ-साथ करते थे। बचपन से ही सेना में भर्ती होना चाहता था। जब युवा हुआ तो जहां भी सेना में भर्ती होती, जरूर आवेदन करते थे। दोनों इकट्ठे अभ्यास करते थे। मित्र के जाने का दुख है, लेकिन गर्व भी है कि देश सेवा के लिए उन्होंने प्राण न्यौछावर कर दिए। -विनोद कुमार
अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटा प्रशासन
शहीद हरि सिंह के अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों के साथ-साथ जिला प्रशासन भी तैयारी में जुट गया है। उपमंडल अधिकारी कुशल कटारिया, डीएसपी अनिल कुमार व बीडीपीओ बावल टीम के साथ दोपहर करीब 12 बजे गांव में पहुंचे। गांव के बाहर मुख्य रोड पर स्कूल के समीप ही करीब 15 वर्ष पहले शहीद हुए वेदपाल की प्रतिमा के समीप ही अंतिम संस्कार के लिए स्थान का चयन कर साफ-सफाई शुरू करवाई गई है।
हरि सिंह की शहादत पर 20 ग्रेनेडियर्स को भी गर्व
हरि सिंह की शहादत पर 20 ग्रेनेडियर्स को भी गर्व है। कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आरबी अलावेकर ने दिसंबर 2018 में डबल एक्स के सभी रैंकों की तरफ से हरि सिंह को 13 नवंबर 2018 को लॉन्च किए गए ऑपरेशन में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों को गिरफ्तार करने पर बधाई दी थी। उन्होंने पत्र में कहा था कि हरि सिंह की उपलब्धि असाधारण साहस और पेशेवर कौशल को प्रदर्शित करती है। इस उपलब्धि ने 20 ग्रेनेडियर्स परिवार के प्रत्येक सदस्य का सीना चौड़ा कर दिया।