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स्मृति विशेष: ऐसे कॉमेडी किंग, जिनकी 'मौत' ने लोगों को जीना सिखाया

Wed, 26 Oct 2016 10:16 AM IST
टीम डिजीटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजीटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 26 Oct 2016 10:16 AM IST
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Jaspal Bhatti special: the Comedy King, whose "death" of the people taught to live
हंसाने की कला के जादूगर जसपाल भट्टी - फोटो : File Photo
लोगों को हंसाने की कला के जादूगर जसपाल भट्टी भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी 'मौत' भी लोगों को जीना सिखाती है।
Jaspal Bhatti special: the Comedy King, whose "death" of the people taught to live
हंसाने की कला के जादूगर जसपाल भट्टी
25 अक्तूबर यानि आज के दिन ही 2012 में सड़क हादसे में 57 साल की उम्र में जसपाल भट्टी का निधन हो गया था। हादसे के वक्त वे कार में पीछे की सीट पर बैठे हुए थे। 2013 में चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस ने भट्टी को एक साल के लिए ब्रांड एंबेसडर बनाया था। पुलिस का मानना था कि भले ही पीछे की सीट पर बेल्ट बांधने का रूल नहीं है, लेकिन अगर उन्होंने बेल्ट बांधा होता तो शायद आज वे जिंदा होते। पुलिस ने भट्टी को एंबेसडर बनाकर लोगों को सीट बेल्ट बांधने के लिए प्रेरित किया।
Jaspal Bhatti special: the Comedy King, whose "death" of the people taught to live
हंसाने की कला के जादूगर जसपाल भट्टी
जसपाल भट्टी की विशुद्ध सामाजिक कॉमेडी जनता के बीच हमेशा रहेगी। जसपाल भट्टी को द्विअर्थी संवादों और उल जलूल हरकतों के बिना स्वस्थ कामेडी का किंग कहा जाता है। 3 मार्च, 1955 को अमृतसर में जन्मे जसपाल भट्टी यूं तो अभिनय के शौकीन बचपन से ही थे, लेकिन कॉलेज दिनों में उन पर व्यंग्य करने का ऐसा सुरूर छाया कि एक इंजीनियर जनता को हंसाने का काम करने लगा। भट्टी की खासियत यही रही कि उन्होंने व्यंग्य विधा के बीच जनता के मुद्दों को बहुत सहज तरीके से मंच पर उठाया। 
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Jaspal Bhatti special: the Comedy King, whose "death" of the people taught to live
हंसाने की कला के जादूगर जसपाल भट्टी
जसपाल भट्टी के परिवार वाले चाहते थे कि वो इंजीनियर बने, इसीलिए उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। लेकिन कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने नान्सेंस क्लब बनाया और नुक्कड़ नाटक करने लगे। इस क्लब से सैंकड़ों लोग जुड़ गए और लोगों को भट्टी के स्ट्रीट शो काफी पसंद आए। कॉलेज के बाद हालांकि भट्टी ने ट्रिब्यून अखबार में बतौर कार्टूनिस्ट भी काम किया, लेकिन उनका असल झुकाव तो परदे पर अभिनय और कॉमेडी करना था।

 
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हंसाने की कला के जादूगर जसपाल भट्टी
भट्टी का शौक परवान चढ़ा और 80 के दशक में दूरदर्शन पर उनका शो 'उल्टा पुल्टा' प्रसारित हुआ। राजनीतिक और सामाजिक गतिरोध झेल रही जनता को भट्टी की हल्की फुल्की और जनता से जुड़ी कॉमेडी पसंद आई। लोगों को इस शो में सबसे अच्छी बात लगती थी कि भट्टी बात ही बात में जनता की दुखती रग पर हाथ रखा करते थे। समसामयिक मुद्दों पर व्यंग्य करते हुए भट्टी जनता का मनोरंजन करते थे। लोग इस शो को देखने के लिए सुबह-सुबह ही टीवी के सामने बैठ जाया करते थे।
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