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मोटापा कम करने के बारे में सोच रहे हैं तो अपनाएं ये नुस्खा, कुछ दिन में कम हो जाएगा वजन
Mon, 28 Oct 2019 02:02 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 28 Oct 2019 02:02 PM IST
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अगर आप भी मोटापे से परेशान हैं तो एक नुस्खा अपनाकर कुछ ही दिन में वजन कम कर सकते हैं। इससे कई बीमारियों की रोकथाम में भी मदद मिलेगी।
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वजन कम करने के लिए लोग जाने क्या-क्या करते हैं? कोई जिम जाता है तो कोई डाइटीशियन के चक्कर लगाता है। आजकल एक और लेटेस्ट ट्रेंड है, जिसमें ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती है। विदेशों में तो ये आम है। भारत में भी अब लोग इसे ट्राई करने लगे हैं। इसे इंटरमिटेंट फॉस्टिंग कहते हैं। अब लोग इस बारे में बात करने लगे हैं और डायटीशियन और एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से सलाह ले रहे हैं। कई लोगों ने इंटरमिटेंट फॉस्टिंग कर बहुत कम समय में वजन कम करने में कामयाबी पाई है।
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पीजीआई के विशेषज्ञ मानते हैं कि इंटरमिटेंट फॉस्टिंग वजन कम करने और डायबिटीज की रोकथाम के लिए सबसे बढ़िया जरिया है। पीजीआई के एंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर संजय भदादा ने बताया कि फॉस्टिंग तो भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है। इससे वे सेल खत्म हो जाते हैं, जो काम नहीं कर रहे होते हैं। अच्छे सेल को रेजुवनेट (नया) करता है। इससे कई बीमारियों के रोकथाम में मदद मिलती है। भारत के कई क्रिकेटर भी इंटरमिटेंट फॉस्टिंग करते हैं। इनमें विराट कोहली, सचिन तेंदुलकर और सुनील गवास्कर शामिल हैं।
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क्या है इंटरमिटेंट फॉस्टिंग
इंटरमिटेंट फास्टिंग एक तरह से खाने का तरीका है। इसमें 16 से 18 घंटे तक कुछ नहीं खाना होता है। यदि यह तरीका अपनाना चाहते हैं तो उसका पैटर्न कुछ इस तरह से होगा। मान लीजिए आप सोमवार को इंटरमिटेंट फॉस्टिंग रखना चाहते हैं तो शाम छह बजे तक रुटीन खाना खाइए। उसके बाद अगले दिन सुबह दस बजे तक कुछ नहीं खाना है। चने का एक दाना तक नहीं निगलना है। इस दौरान लिक्विड डाइट ले सकते हैं। पानी पी सकते हैं। नींबू पानी, ग्रीन टी और ब्लैक कॉफी भी पी सकते हैं। कुल मिलाकर 16 घंटे तक बिना कैलोरी के रहना है। हफ्ते में एक दिन इस तरीके को अपनाया जा सकता है। यानी महीने में चार दिन। इसे हफ्ते में दो दिन भी कर सकते हैं। जितना आपका शरीर साथ दे दे।
इंटरमिटेंट फास्टिंग एक तरह से खाने का तरीका है। इसमें 16 से 18 घंटे तक कुछ नहीं खाना होता है। यदि यह तरीका अपनाना चाहते हैं तो उसका पैटर्न कुछ इस तरह से होगा। मान लीजिए आप सोमवार को इंटरमिटेंट फॉस्टिंग रखना चाहते हैं तो शाम छह बजे तक रुटीन खाना खाइए। उसके बाद अगले दिन सुबह दस बजे तक कुछ नहीं खाना है। चने का एक दाना तक नहीं निगलना है। इस दौरान लिक्विड डाइट ले सकते हैं। पानी पी सकते हैं। नींबू पानी, ग्रीन टी और ब्लैक कॉफी भी पी सकते हैं। कुल मिलाकर 16 घंटे तक बिना कैलोरी के रहना है। हफ्ते में एक दिन इस तरीके को अपनाया जा सकता है। यानी महीने में चार दिन। इसे हफ्ते में दो दिन भी कर सकते हैं। जितना आपका शरीर साथ दे दे।
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ऐसे कम होता है फैट
विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर को चलाने के लिए कैलोरी की आवश्यकता होती है। इंटरमिटेंट फॉस्टिंग के दौरान शरीर के अंदर कैलोरी नहीं जाती, जबकि बॉडी को काम करने के लिए कैलोरी की जरूरत पड़ती है तो इस स्थिति में बॉडी के अंदर जमा फैट कैलोरी के रूप में काम करता है और वह बर्न होती रहती है। इस दौरान डाइजेस्टिव सिस्टम पूरी तरह से शट डाउन होता है। फास्टिंग के दौरान इंसुलिन लेवल नीचे जाता है और फैट सेल्स अपनी स्टोर की हुई शुगर एनर्जी देने के लिए रिलीज करता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर को चलाने के लिए कैलोरी की आवश्यकता होती है। इंटरमिटेंट फॉस्टिंग के दौरान शरीर के अंदर कैलोरी नहीं जाती, जबकि बॉडी को काम करने के लिए कैलोरी की जरूरत पड़ती है तो इस स्थिति में बॉडी के अंदर जमा फैट कैलोरी के रूप में काम करता है और वह बर्न होती रहती है। इस दौरान डाइजेस्टिव सिस्टम पूरी तरह से शट डाउन होता है। फास्टिंग के दौरान इंसुलिन लेवल नीचे जाता है और फैट सेल्स अपनी स्टोर की हुई शुगर एनर्जी देने के लिए रिलीज करता है।