6 बेटियां, जिनके सरपंच बनने की कहानी जोश भर देगी
हरियाणा में पंचायत चुनाव के पहले चरण में कई बेटियां बिल्कुल विपरीत परिस्थितियों में सरपंच बनी हैं। देखिए, ऐसी 6 बेटियों की कहानी।
6 बेटियां, जिनके सरपंच बनने की कहानी जोश भर देगी
बर्गर बेचने वाली बनी सरपंच: हरियाणा के फतेहाबाद जिले के चपलामोरी गांव की सरपंच रेखा। पिता बंसीलाल दिहाड़ी मजदूर हैं। करीब 15 दिन पहले तक यह सांवली सी युवती चंडीगढ़ में बर्गर किंग रेस्टारेंट पर काम करती थी और आज इस गांव की सरपंच बन गई। पहली बार सितंबर में नामांकन इस वजह से रद्द कर दिया गया की उम्र 21 साल पूरी नहीं हुई थी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक योग्यता लागू करने को लेकर पंचायत चुनाव पर स्टे लगा दिया।
6 बेटियां, जिनके सरपंच बनने की कहानी जोश भर देगी
दिसंबर में जब सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षिक योग्यता सहित सभी शर्तों को लागू करते हुए चुनाव को हरी झंडी तब तक रेखा 21 बरस की हो चुकी थी। सरपंच पद के लिए आवश्यक आयु योग्यता पूरी होती ही रेखा ने गांव आकर एससी आरक्षित सीट पर सरपंच के लिए नामांकन भर दिया। नतीजा आया तो गांव वालों ने उसे सिर आंखों पर बिठा लिया। रेखा ने 1001 वोटों में से 610 मत हासिल किए। उसकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्मल को 394 वोट मिले। (तस्वीर में रेखा दाएं ख्ाड़ी हैं)
6 बेटियां, जिनके सरपंच बनने की कहानी जोश भर देगी
दुल्हन बनी सरपंच: शर्तों के कारण मां चुनाव नहीं लड़ पाई तो दिल्ली पुलिस के सिपाही ने नामांकन से ठीक पहले लव मैरिज की और एमएससी पास बहू को मैदान में उतार दिया। गांधरा गांव ने भी पढ़ी लिखी बहू का खूब साथ दिया और नई नवेली दुल्हन को चौधर का हार पहना दिया। सोनू को चट मंगनी और पट ब्याह की रणनीति से कामयाबी मिली और जीवनसाथी के साथ चौधर भी मिल गई। रजनी मैथ से एमएससी, बीएड और नेट पास हैं।
6 बेटियां, जिनके सरपंच बनने की कहानी जोश भर देगी
पहले जन्मा बेटा, एक वोट से जीतीं: कैथल के गांव डेरा गदला में चुनाव से एक दिन पहले वीरपाल कौर ने बेटे को जन्म दिया तो अगले ही दिन एक वोट से सरपंच पद का चुनाव जीतकर परिवार को दोहरी खुशियां दीं। पूर्व सरपंच साहब सिंह विर्क की पुत्रवधू वीरपाल चुनाव मैदान में डटी थीं। गर्भवती होने के कारण वह प्रचार में नहीं जा सकी। शनिवार को ही उसने बेटे को जन्म दिया। एमकॉम पास वीरपाल कौर महज एक वोट से विजयी घोषित हुईं।