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पाकिस्तान की जेलों में पहुंच गए हैं कई भारतीय, खबर पढ़ें और अलर्ट रहें...वरना जिंदगी बर्बाद
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
Updated Mon, 06 Aug 2018 02:00 PM IST
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कई भारतीय युवक पाकिस्तान की जेलों में कैद हैं और कई पहुंच गए हैं, पहुंचा दिए गए हैं। ये खबर पढ़कर आपको एक बार झटका लगेगा, पर भविष्य के लिए अलर्ट हो जाएंगे।
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सरकार द्वारा ट्रेवल एजेंटों पर लगाम न लगाने का नतीजा है कि इस गोरखधंधे में सैकड़ों पंजाबी युवक अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठे हैं। ये युवा पाकिस्तान से लेकर विश्व की कई जेलों में कैद हैं और उनके परिवार अपने लाडलों की राह ताक रहे हैं कि डॉलर कमाने के लिए घर से निकले उनके लाडले शायद वापस आ ही जाएं। यह गोरखधंधा 80 के दशक से चला आ रहा है। 1996 में माल्टा बोट त्रासदी हुई थी, जिसमें 283 पंजाबी युवक एक बोट पर अवैध रुप से यूरोप जा रहे थे, तभी उनकी बोट डूब गई। इस हादसे से सरकार की नींद नहीं टूटी।
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2016 में पनामा बोट हादसा हो गया। अवैध आव्रजन रैकेट के चंगुल में फंसे पंजाब के 25 युवाओं का पता नहीं चल पाया। ये सभी एक नाव में अवैध रूप से अमेरिका के लिए रवाना हुए थे। नाव 10 जनवरी 2016 को पनामा के पास डूब गई। हादसे में बचे एक युवक ने अपने परिवार को हादसे की जानकारी दी तो पता चला कि सभी मौत के मुंह में चले गए हैं। सरकार एजेंटों के प्रति कितनी गंभीर है, इसका पता इससे चलता है कि मालटा हादसे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता बलवंत सिंह खेड़ा ने माल्टा बोट ट्रेजडी मिशन का गठन किया।
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वह इस हादसे के दोषियों को सजा दिलाना चाहते थे लेकिन 29 ट्रेवल एजेंटों के खिलाफ आरोप-पत्र तक नहीं दायर हुए, जिन पर केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मामला दर्ज किया था। इटली में तो इस मामले के तीन आरोपियों को सजा हुई, लेकिन भारत में सभी आजाद ही रहे। इस गोरखधंधे में कई लोग अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठे, वहीं काफी पंजाबी युवक पाकिस्तान की जेलों में पहुंच गए। इनको समुद्री रास्ते से नहीं बल्कि अवैध रूप से बार्डर क्रास कर यूरोप ले जाया जा रहा था। तुर्की में इन युवकों को काबू कर ईरान और वहां से पाकिस्तान धकेल दिया गया।
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प्रतीकात्मक चित्र
यूपीए सरकार में 57 ऐसे पंजाबी युवकों के बारे में पता चला जो पाकिस्तान की क्वेटा, कोट लखपत राय जेलों में बंद थे, जिनको काफी प्रयास के बाद रिहा करवाया गया। ये युवक रोजगार के सिलसिले में यूरोप जाने के चक्कर में यूनान और तुर्की पहुंच गए जहां से इन्हें पकड़ कर ईरान और वहां से पाकिस्तान पहुंचा दिया गया। स्थानीय गुज्जा पीर इलाके के रहने वाला प्रदीप कुमार आज भी पाकिस्तान की जेल के मंजर को याद कर सिहर उठता है। प्रदीप ने बुल्गारिया जाने के लिए अवैध प्रयास किया था। उनके पास वैध वीजा और सीरिया तक वापसी टिकट था।