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इस शख्स ने बताए मशहूर वैज्ञानिक प्रोफेसर यशपाल से जुड़े 8 बड़े राज, जानिए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 28 Jul 2017 09:29 AM IST
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मशहूर वैज्ञानिक प्रोफेसर यशपाल
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देश के जाने माने वैज्ञानिक और पद्म विभूषण प्रोफेसर यशपाल अब नहीं रहे। उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके एक दोस्त ने प्रोफेसर की निजी जिंदगी से जुड़े कई राज खोले, जानिए।
मशहूर वैज्ञानिक प्रोफेसर यशपाल
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के वाइस चांसलर प्रोफेसर अरुण ग्रोवर बताते हैं कि पंजाब यूनिवर्सिटी से उनकी खास यादें जुड़ी हैं। 1997 से 99 तक प्रो. यशपाल पीयू के फिजिक्स विभाग में ऑनररी प्रोफेसर रहे। उन्होंने एक बार पीयू में लेक्चर भी दिया था और अक्सर यहां आते रहे। दिवंगत आत्मा की शांति के लिए मंगलवार को फिजिक्स विभाग के विद्यार्थी जमा हुए और प्रार्थना की। पीयू के वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर ने भी शोक जताया और प्रो. यश के साथ बिताए कुछ पल भी साझा किए।
मशहूर वैज्ञानिक प्रोफेसर यशपाल
प्रोफेसर अरुण ग्रोवर ने अपने शोक संदेश में कहा कि प्रोफेसर यशपाल को काफी समय से जानते थे। जब वे स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के फाउंडर डायरेक्टर थे। फिर पीयू में आने के बाद भी उनसे मुलाकात का मौका मिला। वे सभी के लिए प्रेरणादायक हस्ती थे। वे अच्छे स्वभाव के धनी इंसान थे। अगर क्वालिटी एजूकेशन की बात करें, तो उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम किया। पीयू में भी लेक्चर देकर उन्होंने काफी कुछ सीखाया। उनके जाने से दुख है।
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मशहूर वैज्ञानिक प्रोफेसर यशपाल
प्रोफेसर अरुण ग्रोवर बताते हैं कि स्टूडेंट लाइफ से लेकर अब तक उनके जीवन पर प्रोफेसर यशपाल का प्रभाव रहा। जब वह पढ़ते थे तो प्रो यशपाल का एक आर्टिकल अंग्रेजी के अखबार में सेंट्रल पेज पर छपा था। इसमें उन्होंने लिखा था कि आप साइंस को चुन रहे हैं, लेकिन क्या आपने इसके लिए अपनी क्षमताओं को परखा है। उनका कहना था कि ऐवरेज लेवल की साइंस न तो आपको संतुष्टि देगी और ना ही दूसरों को।
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मशहूर वैज्ञानिक प्रोफेसर यशपाल
प्रोफेसर ग्रोवर ने बताया कि अप्रैल 2015 में प्रोफेसर यशपाल आखिरी बार पंजाब यूनिवर्सिटी आए थे। तब उन्होंने प्रोफेसर बीएम आनंद ऑडिटोरियम में लेक्चर दिया था। रुचिराम साहनी पर पोस्टल स्टैंप जारी करने के भी 2013 में प्रो. यशपाल खासतौर पर पहुंचे थे। स्कूली बच्चों के बैग को हल्का करने की सिफारिश प्रोफेसर यशपाल ने ही की थी। उनको चिंता थी कि बच्चों के भारी-भरकम स्कूली बैग कंधों पर बोझ हैं। इस सोच पर अब काम होने भी लगा है।