साढ़े 11 हजार फुट की ऊंचाई से गिरकर जान गंवाने वाले पैराजंपर हरदीप सिंह को अंतिम विदाई दी गई। जब शव घर पहुंचा तो उसे देखकर मां-बाप बदहवास हो गए।
हरदीप सिंह (24) का पार्थिव शरीर शनिवार बाद दोपहर उनके गांव तलवंडी मलिक में लाया गया। इस मौके पर हर गांव वासी की आंखें नम थीं। मां अकविंदर कौर और पिता भूपिंदर सिंह का रो-रो कर बुरा हाल था। गांव के श्मशान घाट में सरकारी सम्मान के साथ हरदीप सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
इससे पहले हरदीप सिंह के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शनों के लिए उनके घर पर रखा गया। बाद में फौज की गाड़ी में पार्थिव शरीर को गांव के श्मशान घाट ले जाया गया। इस मौके पर रिसालदार शिव राम सिंह की अगुवाई में पहुंचे 43 आर्म्ड ब्रिगेड के जवानों की ओर से सलामी दी गई। पिता भूपिंदर सिंह ने हरदीप सिंह की चिता को मुखाग्नि दी।
आगरा में ट्रेनिंग कैंप के दौरान जहाज से जंप करने के बाद पैराशूट न खुलने के कारण करीब साढ़े 11 हजार फीट की ऊंचाई से गिर कर जवान हरदीप सिंह की मौत हो गई थी। 11वीं पैरा रेजीमेंट के लेफ्टिनेंट विकास कापरी ने कहा कि जब यह हादसा हुआ, तब वह आगरा में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि जंप करते समय पैराशूट में हवा न भरने के कारण वह नहीं खुला।
उन्होंने बताया कि दूसरा पैराशूट भी उतारा गया, लेकिन वह भी नहीं खुला। जिस कारण यह हादसा हो गया। इससे पहले मार्च में पैराशूट न खुलने कारण एक जवान की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि पैराशूट न खुलने के बहुत कम कारण होते हैं, जिसकी उच्चस्तरीय विभागीय जांच कराई जाएगी।