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शहीद के ताबूत से लिपट मां बोली--‘खड़ा हो जा पुत्त ‘मोहनी’ कित्थे चला गया तूं, रब्बा मैनूं चक लेंदा’

Fri, 19 Jun 2020 07:06 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, संगरूर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, संगरूर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Fri, 19 Jun 2020 07:06 PM IST
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India-China Tension: Last Rites Of Galwan Valley Martyr Gurvinder Singh In Sangrur
Punjab - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

लद्दाख में चीनी सैनिकों से लोहा लेते हुए शहीद हुए सिपाही गुरविंदर सिंह (22) को आंसुओं के सैलाब के बीच शुक्रवार को अंतिम विदाई दी गई। शुक्रवार शाम शहीद का पार्थिव शरीर गांव तोलावाल पहुंचा। जैसे ही पार्थिव शरीर गांव में उनके घर पहुंचा तो तिरंगे में लिपटे ताबूत को देखकर मां चरणजीत कौर के सब्र का बांध टूट गया। ताबूत से लिपटकर रोती मां को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। 

India-China Tension: Last Rites Of Galwan Valley Martyr Gurvinder Singh In Sangrur

चरणजीत कौर ने अपने बेटे को प्यार से रखे नाम ‘मोहनी’ कह कर पुकारा। ‘खड़ा हो जा पुत्त मोहनी कित्थे चला गया तूं, रब्बा मैनूं ही चक लेंदा, मेरे पुत्त नूं भरी जवानी विच्च ले गया।’ बार- बार मां अपने बेटे को छूने की कोशिश करती रहीं। शहीद की बड़ी बहन सुखजीत कौर रोते-रोते बोली ‘वीरे तूं छेती आऊण दा वादा करके कित्थे चला गया, असीं तां तेरे विवाह दीयां तैयारियां कर रहे सी।’ पिता लाभ सिंह और बडे़ भाई गुरप्रीत सिंह भी फूट फूट कर रोए। उन्होंने कहा कि अपने बेटे की शहादत पर नाज है लेकिन यह दुख जीवन में भूल नहीं सकते हैं। 

India-China Tension: Last Rites Of Galwan Valley Martyr Gurvinder Singh In Sangrur
Punjab - फोटो : अमर उजाला

लाभ सिंह ने कहा कि उनका बेटा बेहद विनम्र व बहादुर था। अंतिम संस्कार से पहले परिजनों ने शहीद के सिर पर सेहरा सजाया और अपने नौजवान बेटे को अंतिम सलामी दी। मातमी धुनों के बीच भारतीय सेना ने अपने हथियार उल्टे करके शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर और सलामी दी। इसके बाद आर्मी अधिकारियों ने परिजनों को ताबूत में लिपटा तिरंगा सौंपा। शहीद के पिता व भाई ने चिता को मुखाग्नि दी।
 

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शहीद गुरविंदर सिंह की पार्थिव देह के काफिले पर जखेपल, हंबलवास, चौबास व धालीवाल आदि गांवों के लोगों ने फूलों की वर्षा करके श्रद्धा सुमन अर्पित किए। बड़ी संख्या में लोग सड़क के किनारे खडे़ रहे और काफिले के आने पर शहीद गुरविंदर अमर रहे के नारों के बीच फूल अर्पित किए। इससे पहले शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शहीद के घर पहुंचकर परिजनों से संवेदना जताई।

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पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा के अलावा एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने भी पीड़ित परिवार से दुख साझा किया। अंतिम संस्कार के दौरान कैबिनेट मंत्री विजयइंदर सिंगला, पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना और विधायक अमन अरोड़ा समेत डीसी रामवीर, एसएसपी संदीप गर्ग मौजूद रहे।

गांव के स्कूल को दिया शहीद गुरविंदर सिंह का नाम
शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने एलान किया कि पंजाब सरकार की तरफ से शहीद की याद को शाश्वत बनाने को गांव के सरकारी स्कूल का नाम शहीद गुरविंदर सिंह के नाम पर रखा जाएगा। इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की तरफ से बाकी तीन शहीदों के सम्मान में भी उनके गांवों के सरकारी स्कूलों के नाम भी शहीदों के नाम पर रखे जाएंगे।

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