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स्वतंत्रता दिवसः आज भी जिंदा हैं 'अकबर, अंगद और शहंशाह'...देश में ही रहते हैं, इस जगह पर
ब्यूरो/अमर उजाला, रेवाड़ी(हरियाणा)
Updated Wed, 15 Aug 2018 08:18 AM IST
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रेवाड़ी लोको शेड
आपको जानकर हैरानी होगी कि 'अकबर, अंगद, सुल्तान और शहंशाह' आज भी जिंदा हैं और देश में ही रहते हैं। जानना चाहते हैं कहां पर, तो यहां देख लीजिए, यकीं नहीं कर पाएंगे।
स्टीम इंजन
ये कोई और नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे पुराने स्टीम इंजन हैं, जो आज भी देश में मौजूद हैं और एक शहर के लोको शेड में खड़े हैं। इन इंजनों में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डधारी सबसे पुराना और सबसे हल्का फेयरी क्वीन शामिल है। सबसे भारी इंजन अंगद भी शुमार है। इसके अलावा आजादी का प्रतीक बना भाप का इंजन आजाद और अकबर भी शामिल हैं और ये सभी खड़े हैं हरियाणा में रेवाड़ी जिले के लोको शेड में। यहां कई बॉलीवुड फिल्मों, जैसे ‘गुरु’,‘गांधी-माई फादर’,‘रंग दे बसंती’,‘गदर एक प्रेम कथा’,‘भाग मिल्खा भाग’,‘1942-ए लव स्टोरी’,‘सुल्तान’ आदि की शूटिंग हुई है।
स्टीम इंजन अकबर के हाथ
- फोटो : फाइल फोटो
दो साल पहले सलमान खान खुद रेवाड़ी लोकोशेड में ‘सुल्तान’ फिल्म की शूटिंग करने पहुंचे थे। वहां दो दिन तक उन्होंने ऐतिहासिक भाप इंजन ‘अकबर’ के साथ दौड़ लगाई थी। भारतीय रेलवे ने 15 अगस्त, 1947 को अमेरिका से पहली बार ‘आजाद’ नामक भाप का इंजन मंगाया था। उसकी याद में इस वर्ष अप्रैल में नई दिल्ली से पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के बीच ‘आजाद’ को दोबारा पटरियों पर दौड़ाया गया। चितरंजन लोको वर्क्स में निर्मित ‘अकबर’ नामक इंजन को पहली बार 1965 में चलाया गया था।
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भाप इंजन फेयरी क्वीन
फेयरी क्वीन
निर्माण सन: 1855(यूनाइटेड किंगडम)
स्पीड: 40 किमी/घंटा
इंजन:130 हॉर्स पावर
इंजन वेट: 26 टन
इतिहास: ईस्ट इंडिया कंपनी फेयरी क्वीन को लेकर भारत में आई थी। 1998 में इसे दुनिया के सबसे पुराने चालू हालत के भाप के इंजन के रूप में गिनीज रिकॉर्ड मिला था। यह ट्रेन पहले दिल्ली और अलवर के बीच फेयरी क्वीन स्पेशल के नाम से चलती थी। इसके अलावा भाप के सबसे हल्के इंजनों में भी यह शामिल है। सुंदरता के चलते इस सबसे हल्के भाप के इंजन का नाम फेयरी क्वीन रखा गया।
निर्माण सन: 1855(यूनाइटेड किंगडम)
स्पीड: 40 किमी/घंटा
इंजन:130 हॉर्स पावर
इंजन वेट: 26 टन
इतिहास: ईस्ट इंडिया कंपनी फेयरी क्वीन को लेकर भारत में आई थी। 1998 में इसे दुनिया के सबसे पुराने चालू हालत के भाप के इंजन के रूप में गिनीज रिकॉर्ड मिला था। यह ट्रेन पहले दिल्ली और अलवर के बीच फेयरी क्वीन स्पेशल के नाम से चलती थी। इसके अलावा भाप के सबसे हल्के इंजनों में भी यह शामिल है। सुंदरता के चलते इस सबसे हल्के भाप के इंजन का नाम फेयरी क्वीन रखा गया।
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first railway steam engine
आजादी का प्रतीक बना है आजाद
निर्माण सन्: 1947(अमेरिका)
स्पीड:100 किमी/घंटा
इंजन: 1445 हॉर्स पावर
इंजन वेट: 174.28 टन
इतिहास: जैसा कि इंजन का नाम ही इसकी काफी हद तक विशेषता बताता है, ‘आजाद’। अमेरिका में बने इस इंजन को यूनाइटेड स्टेट और अमेरिका ने भारत की आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को बतौर उपहार भेंट किया था। इसी के चलते इस इंजन का नाम आजाद रखा गया। यह इंजन आज भी भारत की आजादी का प्रतीक बना हुआ है।
निर्माण सन्: 1947(अमेरिका)
स्पीड:100 किमी/घंटा
इंजन: 1445 हॉर्स पावर
इंजन वेट: 174.28 टन
इतिहास: जैसा कि इंजन का नाम ही इसकी काफी हद तक विशेषता बताता है, ‘आजाद’। अमेरिका में बने इस इंजन को यूनाइटेड स्टेट और अमेरिका ने भारत की आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को बतौर उपहार भेंट किया था। इसी के चलते इस इंजन का नाम आजाद रखा गया। यह इंजन आज भी भारत की आजादी का प्रतीक बना हुआ है।