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स्वतंत्रता दिवसः जानिए वो किस्सा, जब 15 साल के नौ बच्चों ने अंग्रेजों की बजा दी थी ईंट से ईंट

Wed, 15 Aug 2018 08:17 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 15 Aug 2018 08:17 AM IST
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Independence Day, Indian Freedom Movement Against Britishers
independence day
72वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम आपको सुना रहे हैं अंग्रेजी हुकूमत से आजाद होने के लिए लड़ी गई लड़ाई का एक वो सच, जिसे शायद ही कोई जानता होगा।
Independence Day, Indian Freedom Movement Against Britishers
independence day - फोटो : अमर उजाला
आजादी के लिए संघर्ष की ये कहानी सुनाई, 86 वर्षीय रामप्रकाश सेठी(1945 में वे 15 साल के थे)। इन दिनों वे हरियाणा के सिरसा में रह रहे हैं। वे बताते हैं कि वर्ष 1945 था और देश का हर नौजवां आजादी मांग रहा था। हमारे दिल में भी तरंगे उठने लगी। हम राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। उस समय विद्यालय के हैडमास्टर रामचंद्र गुप्ता थे। कक्षा इंचार्ज रसाल सिंह थे। उस रोज हाजिरी के समय यस सर बोला जाता था। हमने जय हिंद बोला। कक्षा इंचार्ज ने हमें डांटा। जय हिंद बोलने पर पाबंदी लगा दी गई।
Independence Day, Indian Freedom Movement Against Britishers
independence day - फोटो : अमर उजाला
रामप्रकाश बताते हैं कि उस समय हमारे दिल में गुस्सा था कि हम जिस देश के रहने वाले हैं, उस देश की जय नहीं बोल सकते। स्कूल में लहलहाते यूनियन जैक (ब्रिटिश झंडे) को देखकर गुस्सा ज्यादा बढ़ गया। हम मौके की तालाश में थे। विद्यालय में स्काऊट का कैंप शुरू हुआ। उसी रोज हमें मालूम पड़ा कि अंबाला के कमीशनर मेक्यूम विजिट के लिए आ रहे हैं। मेक्यूम अंग्रेजी में सात अक्षरों का शब्द था। अंग्रेजी कमीशनर के सम्मान में प्रत्येक शब्द की अलग-अलग व्याख्या के लिए हमें मंच पर बोलना था। इस मौके पर हम गंवाना नहीं चाहते थे।
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Independence Day, Indian Freedom Movement Against Britishers
स्वतंत्र भारत की तस्वीरें
इसलिए अपने साथी बिहारी लाल बांसल, मनोहर लाल कामरा, गुरदेव सिंह शांत, ओमप्रकाश छाबड़ा, मदन लाल छाबड़ा, शमुम, रफीक तथा सद्दीक आदि के साथ मिलकर हमनें योजना बनाई। कुछ दिन पहले ही तैयारियां शुरू कर दी। प्रत्येक की डयूटी लगाई गई। अंग्रेजी अधिकारी मेक्यूम आया। उसके सम्मान में मार्च पास्ट चल रहा था, हमने विसल बजानी शुरू कर दी, मार्च पास्ट वहीं थम गया। अब शब्दों के जरिए सम्मान देने की बारी थी। मैंने एम शब्द की व्याख्या करनी थी। बोलना था मर्सी फुल, मैंने कहा मर्सी लैस।
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Independence Day, Indian Freedom Movement Against Britishers
आजाद भारत
योजना के अनुसार अन्य सहयोगियों ने भी ऐसे ही किया। मुख्य रूप से गुरदेव सिंह शांत ने बोलना था। शांत ने कहा कि वुई आर नोट रड्डी टू रिसपेक्ट एनी ब्रिटिश डॉग। हमारे पास काले झंडे थे, हमने मेक्यू को दिखाते हुए गो बैक, गो बैक कहना शुरू कर दिया। शायद हमारे प्लान को स्कूल प्रबंधक समझ चुक थे। हम सभी यूनियन जैक को फाड़ने के लिए दौड़े। लेकिन छत पर चढ़ने के लिए प्रबंधकों ने सीढ़ी गायब कर दी थी। मेक्यूम इतना घबरा किया वह पुलिस सुरक्षा के लिए भाग खड़ा हुआ।
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