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सूरत जैसे अग्निकांड से सबक, इस शख्स ने बनाया कमाल का डिवाइस, बच्चे भी आग पर फेर देंगे पानी

Sun, 26 May 2019 12:37 PM IST
ajay kumar अमित शर्मा, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
अमित शर्मा, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 26 May 2019 12:37 PM IST
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IISER Mohali scientist prepared Indigenous technology for fire extinguishing
आग बुझाने की स्वदेशी तकनीक तैयार - फोटो : अमर उजाला

सूरत में शुक्रवार को हुई भयानक आगजनी के बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) मोहाली के वैज्ञानिक ने आग बुझाने की एक ऐसी तकनीक तैयार करने का दावा किया है, जिसका प्रयोग कर बच्चे या बूढ़े भी आसानी से आग को बुझा पाएंगे। इस तकनीक के लिए किसी भी तरह के केमिकल का नहीं, बल्कि घर में प्रयोग होने वाले सामान का इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक का पेटेंट करवाने की तैयारी भी संस्थान ने कर ली है। जैसे ही तकनीक का पेटेंट हो जाएगा, इसके बाद इसे देश को समर्पित किया जाएगा।

IISER Mohali scientist prepared Indigenous technology for fire extinguishing
- फोटो : अमर उजाला

इस तकनीक को तैयार करने वाले संस्थान के प्रोफेसर डॉ. सम्राट घोष ने दावा किया है कि उन्होंने आग बुझाने की जो तकनीक तैयार की है, उसके बाद लोग फायर एक्सटिंगुइशर को अलविदा कह देंगे, क्योंकि आम लोगों को तो यह चलाने तक नहीं आता। उन्होंने जो तकनीक तैयार की है उसे 5 साल के बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, आसानी से उसे कहीं भी ले जाया जा सकता है जबकि फायर एक्सटिंगुइशर के गिरने आदि से चोट लगने का डर भी बना रहता है। उन्होंने कहा कि जब आग लगती है तो शुरू में छोटी ही होती है, उसे उसी समय काबू पा लिया जाए तो आसानी से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। 

IISER Mohali scientist prepared Indigenous technology for fire extinguishing
- फोटो : अमर उजाला

प्रो. घोष ने बताया कि उनकी इस तकनीक से मेक इन इंडिया मुहिम को भी बल मिलेगा। जब इसका पेटेंट हो जाएगा तो आसानी से लोग घर पर ही इसे तैयार कर पाएंगे। साथ ही आसानी से प्रयोग कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि वह इस तकनीक में आग बुझाने के लिए किस चीज का इस्तेमाल करेंगे, इसके बारे में अभी नहीं बता सकते, क्योंकि कई कंपनियों की इस पर नजर है।

प्रो. घोष ने बताया कि उन्हें आग बुझाने के लिए नई तकनीक तैयार करने का आइडिया इसी साल जनवरी में आया था, जब अचानक उनकी लैब में आग लग गई थी। ऐसे में नुकसान तो काफी हो गया था। हालांकि वहां पर सारे साधन थे। ऐसे में उन्होंने ऐसी तकनीक तैयार करने की सोची थी, जिसका प्रयोग सारे आसानी से कर पाएं।

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IISER Mohali scientist prepared Indigenous technology for fire extinguishing
- फोटो : अमर उजाला

प्रो. घोष ने बताया कि हमारी तकनीक काफी सस्ती है। एक नाई की दुकान पर जो पानी की बोतल प्रयोग होती है, उसी तरह की बोतल लेनी होगी। दो बोतलों का प्रयोग होगा। उसमें घर के सामान से तैयार किया हुआ सामान डालना होगा, जो कि जलती आग पर डालना होगा। इससे आग बुझ जाएगी। एक फायर एक्सटिंगुइशर के लिए जहां साल में करीब 1500 रुपये खर्च आता है, जबकि उनकी तकनीक पर 25 से 50 रुपये खर्च आएगा। इसे वह फिलहाल ट्विन ब्लास्टर का नाम दे रहे हैं।

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IISER Mohali scientist prepared Indigenous technology for fire extinguishing
सुरत के कोचिंग सेंटर में आग - फोटो : सोशल मीडिया

प्रो. घोष ने बताया कि वह इस तकनीक का पेटेंट करवाने के बाद जल्दी ही सरकार को पत्र लिखेंगे। साथ ही मांग करेंगे कि उनके द्वारा तैयार की गई तकनीक से बच्चों व अन्य जगह पर लोगों को आग बुझाने की ट्रेनिंग दी जाए। डॉ. सम्राट घोष इससे पहले पॉल्यूशन फ्री पटाखे भी तैयार कर चुके हैं। उन पटाखों को चलाने के बाद वायु प्रदूषण नहीं होता, बल्कि चमेली और चंपा जैसे फूलों की खुशबू आती है। केंद्र सरकार ने भी उनकी रिसर्च की काफी प्रशंसा की थी।

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