हरियाणा के सोनीपत नगर निगम सीट पर कांग्रेस के युवा निखिल मदान ने मैनेजमेंट के सहारे राजनीति के मंझे खिलाड़ी भाजपा के ललित बत्रा को पटखनी दी। जहां भाजपा के ललित बत्रा 15 साल से राजनीति में सक्रिय है और संगठन व सरकार में बड़े पदों पर रह चुके है। वहीं, मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट निखिल मदान ने राजनीति में कदम रखते ही जीत दर्ज की।
चुनाव में भाजपा के सांसद और मंत्रियों ने प्रचार किया लेकिन ललित बत्रा को जीत हासिल नहीं हो सकी। वहीं हर बार स्थानीय की जगह बाहरी नेताओं पर भरोसा करना भी भाजपा को भारी पड़ रहा है। सोनीपत के नगर निगम बनने के साढ़े पांच साल बाद पहली बार यहां चुनाव हुआ। बता दें कि सोनीपत शहर विधानसभा सीट पर कांग्रेस का विधायक है। वहीं भाजपा मेयर की कुर्सी कब्जाना चाहती थी। भाजपा ने ललित बत्रा पर भरोसा जताया।
ललित बत्रा ने शहर सीट से भाजपा के टिकट पर 2005 में चुनाव लड़ा था और उस समय वह पांचवें नंबर पर रहे थे। उसके बाद वह लोकसभा क्षेत्र के सह प्रभारी रहे तो 2014 से पहले प्रदेश संगठन में सचिव रहे थे। उसके बाद उनको चुनाव प्रबंधन का संयोजक भी बनाया गया और इसके बाद भाजपा सरकार में हरियाणा सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो का वाइस चेयरमैन बनाया गया। यह जिम्मेदारी उनके पास तीन साल तक रही और अगस्त 2020 में ललित बत्रा का कार्यकाल खत्म हुआ था।
वहीं कांग्रेस ने नए चेहरे निखिल मदान को उतारा, जो कभी किसी पद पर नहीं रहे। निखिल मदान मैनेजमेंट से पोस्ट ग्रेजुएट हैं और अपने उस मैनेजमेंट को निखिल ने चुनाव में इस्तेमाल किया। जहां निखिल मदान को 72118 वोट मिले, वहीं ललित बत्रा को 58301 वोट मिले और भाजपा के ललित बत्रा को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा ने नगर निगम चुनाव में ललित बत्रा को जीत दिलाने के लिए सांसद रमेश कौशिक, संजय भाटिया, मंत्री कंवरपाल गुर्जर, विधायक कृष्ण मिड्ढा, मोहनलाल बड़ौली, पूर्व मंत्री कविता जैन, सीएम के पूर्व मीडिया सलाहकार राजीव जैन को उतारा था। सीएम मनोहर लाल खुद भी प्रचार करने के लिए 20 जगह गए थे। जबकि कांग्रेस से पूरे चुनाव की कमान खुद सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने संभाली हुई थी तो केवल एक दिन पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा आए थे।
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भाजपा प्रत्याशी ललित बत्रा।
- फोटो : अमर उजाला
स्थानीय नेताओं पर भरोसा नहीं करना पड़ रहा भारी
वहीं जिस तरह से बरोदा उपचुनाव में भाजपा ने बाहरी नेताओं कृषि मंत्री जेपी दलाल व सासंद संजय भाटिया को पूरी कमान सौंपी थी। इस बार शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर व सांसद संजय भाटिया के हाथों में कमान थी। सांसद रमेश कौशिक जरूर ललित बत्रा को टिकट दिलाने का दावा कर रहे थे। लेकिन अन्य सभी नेताओं को पीछे रखा गया और उन पर भरोसा नहीं करना भी भाजपा को भारी पड़ रहा है।