जाट हिंसा में हरियाणा तबाह, बचे हैं सिर्फ बेबसी के आंसू
हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव की आग में लोगों ने भाईचारा ही नहीं खोया, रोजी-रोटी का सहारा भी गंवा दिया। देखिए, बर्बादी के निशा बयां करती तस्वीरें।
जाट हिंसा में हरियाणा तबाह, बचे हैं सिर्फ बेबसी के आंसू
जिस कारोबार को खड़ा करने में पीढ़ियां खप गईं, वो उन्माद के तूफान में तिनके की तरह उड़ गया। बचे हैं तो सिर्फ बेबसी, लाचारी के आंसू और नफरत। घृणा और नफरत उनके खिलाफ है जिन्होंने चमन को उजाड़ दिया, गुस्सा उन पर भी जो उनकी बर्बादी को तमाशबीन होकर देखते रहे। सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी का सहारा छिन गया। ...कल तक जो मालिक थे आज वो राख के ढेर पर बैठे अपनी बेबसी को कोस रहे हैं। उनकी बेबसी नेताओं पर गुस्सा बनकर फूटी।
जाट हिंसा में हरियाणा तबाह, बचे हैं सिर्फ बेबसी के आंसू
रोहतक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व्यापारियों की पीड़ा सुनने आए तो लोगों ने मुर्दाबाद के नारे लगाए और काले झंडे दिखाए। सीएम मुआवजे का आश्वासन देते रहे, नाकारा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा भी दिया, उन्मादियों को न बख्शने की बात कही, लेकिन जातीय हिंसा की आग में सब कुछ खो चुके इन लोगों का गुस्सा कम न हुआ। आखिरकार सीएम को बीच में ही भाषण छोड़कर जाना पड़ा।
जाट हिंसा में हरियाणा तबाह, बचे हैं सिर्फ बेबसी के आंसू
दिल्ली में भूख हड़ताल छोड़कर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हु्ड्डा भी शहरवासियों की पीड़ा जानने रोहतक आए। गुस्साए लोगों ने उनके आवास पर प्रदर्शन किया। भीड़ में से उन पर किसी ने जूता फेंक दिया। आखिरकार पुलिस को सुरक्षा कारणों का हवाला देकर हुड्डा को वापस दिल्ली जाने को कहना पड़ा। उधर, रोहतक में धरने पर बैठे व्यापारियों को सांत्वना देने पहुंचे पूर्व विधायक बीबी बतरा को व्यापारियों ने उलटे पांव भगा दिया।
जाट हिंसा में हरियाणा तबाह, बचे हैं सिर्फ बेबसी के आंसू
जिदंगी भर की कमाई थी यह दुकान। एक-एक पैसा जोड़ कर, कर्ज लेकर परिवार को आर्थिक मदद देने के लिए शुरू की थी दुकान। कुछ दिन पहले तक यही दुकान दो बच्चों की पढ़ाई और घर के लिए आसरा बनी हुई थी, लेकिन अब यह आसरा, आसरा नहीं रहा, राख के ढेर में तब्दील हो चुका है। कुछ लोगों के उन्माद ने राख कर दिया 8 वर्षों से रोटी दे रही इस दुकान को। यह दर्द डी-पार्क के पास स्थित लेडिज आइटम्स की दुकान संचालिका ग्रीन कॉलोनी निवासी सीमा का है।