हरियाणा में लोकसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के भावी मुख्यमंत्रियों के सपने फिलहाल तोड़ दिए हैं। नतीजों के बाद से जहां कांग्रेसी सकते में हैं, वहीं अब यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश में कांग्रेस का चेहरा कौन होगा जो बिखरी कांग्रेस को एकजुट कर आगे लेकर जाएगा। चार महीने बाद विधानसभा चुनाव हैं और इस स्थिति में कांग्रेस के पास समय भी कम है।
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दीपेंद्र हुड्डा
- फोटो : फाइल फोटो
कांग्रेस हाईकमान ने हरियाणा में लोकसभा चुनाव के दौरान जिस हिसाब से टिकट वितरण किया था, उससे मुकाबला कड़ा होने की उम्मीद थी। सूबे में जो कांग्रेसी नेता भावी मुख्यमंत्री की दौड़ में थे, उन पर हाईकमान ने दांव खेला दिया था। अब सभी दिग्गजों के लिए लोकसभा चुनाव जीतकर हाईकमान को सूबे में अपना दम दिखाना था, ताकि उनके भावी सीएम की दावेदारी को मजबूती मिल सके। मगर भाजपा की इस आंधी में न तो ये कांग्रेसी दिग्गज टिक पाए और न ही अपना किला बचा पाए।
बच्चों की हार से सकते में दिग्गज
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पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा
- फोटो : फाइल फोटो
सन 1977 के बाद इस बार भी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस हरियाणा में एक भी सीट नहीं जीत पाई। कांग्रेस के सभी दिग्गज भाजपा के चक्रव्यूह में फंसकर परास्त हो गए। ये वे दिग्गज थे जो खुद को कांग्रेस के भावी सीएम के रूप में पेश करते हैं। इस बार ये दिग्गज या तो खुद चुनाव लड़ रहे थे या अपने बच्चों को चुनाव लड़ा रहे थे। दो बार के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को हाईकमान ने सोनीपत से उतारा था। हुड्डा ने मंच से दावा भी कर दिया था कि इस बार वे सोनीपत से दिल्ली और दिल्ली से चंडीगढ़ का रास्ता तय करेंगे।
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अशोक तंवर
- फोटो : फाइल फोटो
उनका इशारा साफ था कि सांसद बनने के बाद वह विधानसभा चुनाव में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे और सीएम बनकर चंडीगढ़ पहुंचेंगे, भले इसके लिए उन्हे सांसद पद ही क्यों न छोड़ना पड़े। लेकिन भाजपा के उलटफेर के आगे हुड्डा बेदम हो गए और भाजपा प्रत्याशी रमेश चंद कौशिक से 164864 वोटों से हार गए। भूपेंद्र सिंह हुड्डा को दूसरा झटका रोहतक में लगा जब उनके तीन बार के सांसद बेटे अपनी सीट भी नहीं बचा पाए। वह भी रोहतक सीट से भाजपा प्रत्याशी अरविंद शर्मा से कड़े मुकाबले में हार गए। अब इसी हार ने बतौर लोकसभा चुनाव समन्वय समिति हरियाणा के चेयरमैन भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व पर भी सवाल खड़ा कर दिया है।
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पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव
- फोटो : फाइल फोटो
इसके अलावा भावी सीएम के अन्य दावेदार दिग्गजों में जहां हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अशोक तंवर सिरसा सीट से 3 लाख से अधिक वोटों के अंतर से हारे तो वहीं पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव को गुरुग्राम सीट से पौने चार लाख से अधिक वोटों के अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा। इसके अलावा पूर्व कैबिनेट मंत्री सैलजा भी अंबाला सीट से 342345 वोटों के अंतर से हार गईं। इन तीनों दिग्गजों की इतनी बड़े अंतर की हार ने उन्हे भी भावी सीएम की दौड़ में पीछे धकेल दिया है।