हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के दसवीं कक्षा के परिणाम में टॉप थ्री में स्थान बनाने वाली हिसार की बेटियों ने पढ़ाई पर फोकस किया। कोई सात-आठ घंटे लगातार पढ़ी तो किसी ने टीवी-मोबाइल का बहिष्कार किया। सोशल मीडिया से भी दूरी बनाए रखी और शिक्षकों के बताए अनुसार अपनी पढ़ाई करती रहीं। खास बात यह है कि उन्होंने यह नहीं सोचा था कि उनका परिणाम इस कदर शानदार रहेगा, बस वे तो कर्म करो फल की चिंता न करो की नीति पर अपनी पढ़ाई ध्यान लगाकर करती रहीं।
टॉपर्स की जुबानी: कोई 8 घंटे लगातार पढ़ी तो किसी ने टीवी, मोबाइल व सोशल मीडिया से बनाई दूरी
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टीवी बहुत कम देखती थी टॉपर रिशिता
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में 500 में से 500 अंक लेकर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली रिशिता ने बताया कि वह नॉर्मल दिनों में 5 से 6 घंटे पढ़ाई करती थी और परीक्षा के दिनों में 7-8 घंटे तक पढ़ाई करती थी। क्रिकेट में भी रुचि है और टीवी बहुत ही कम देखती है। उन्हें बाहर की बजाय घर का खाना पसंद है। रिशिता का लक्ष्य डॉक्टर बनना है।
उनकी माता विक्की देवी टैगोर स्कूल में ही प्राइमरी टीचर हैं और पिता मार्केट कमेटी में अकाउंटेंट हैं। रिशिता ने बताया कि उसने कभी नहीं सोचा था कि वह इस मुकाम तक पहुंच जाएगी। उसने कभी पढ़ाई के लिए दिमाग पर बोझ नहीं लिया। उसने अपनी इस कामयाबी का श्रेय खुद की मेहनत, स्कूल स्टाफ व अपने माता पिता को दिया है।
साल में तीन-चार बार रिवाइज किया सिलेबस: निकिता
बोर्ड की टॉप थ्री की सूची में दूसरा स्थान हासिल करने वाली निकिता मारुति सावंत शहर के मोरी गेट की रहने वाली है। निकिता के मुताबिक साल में उसने तीन-चार बार सिलेबस कवर किया। इस कारण से परीक्षा के समय ज्यादा टेंशन भी नहीं थी। स्कूल में जो पढ़ाते थे, उसे घर आकर अच्छे से रिवाइज करती थी। स्कूल टाइम के अलावा दिन में पांच-छह घंटे पढ़ती थी। निकिता ने बताया कि वह 11वीं कक्षा में नॉन मेडिकल संकाय लेना चाहती है। निकिता के पिता मारुति सावंत ज्वेलर की दुकान पर काम करते हैं और मां सुशीला सावंत एक गृहिणी हैं।
रट्टा न मारकर हर टॉपिक को समझा: अंकिता
बोर्ड की टॉप थ्री की सूची में दूसरे स्थान पर रहने वाली अंकिता गांव खांडा खेड़ी की रहने वाली है। अंकिता ने बताया कि उसने कभी रट्टा नहीं मारा और हर टॉपिक को अच्छे से समझा। दिनभर में वह 10 से 12 घंटे पढ़ती थी। एग्जाम से पहले सिलेबस को चार से पांच बार अच्छी तरह रिवाइज किया। कभी सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी नहीं किया। अंकिता ने बताया कि वह डॉक्टर बनना चाहती है। अंकिता के पिता राजेश एक किसान और मां सुनीता एक गृहिणी हैं।
स्कूल में करवाए गए काम को घर पर करती थी रिवाइज: चहक
बोर्ड की टॉप थ्री की सूची में तीसरा स्थान हासिल करने वाली चहक नारनौंद की रहने वाली है। चहक ने बताया कि स्कूल में जो पढ़ाया जाता था, वह घर आकर उसे अच्छी तरह से रिवाइज करती थी। स्कूल टाइम के अलावा चार से पांच घंटे पढ़ती थी। मोबाइल पर कभी समय बर्बाद नहीं किया। चहक के मुताबिक वह अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों व माता-पिता को देना चाहती है। चहक के पिता राममेहर रोहिल्ला एक निजी स्कूल में शिक्षक व मां दर्शना एक गृहिणी हैं।