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ये हैं वो सात निर्दलीय विधायक, जो तय करेंगे आज, खट्टर के सिर सजेगा या नहीं मुख्यमंत्री का 'ताज'
Fri, 25 Oct 2019 01:54 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 25 Oct 2019 01:54 PM IST
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खट्टर का साथ दे रहे सात निर्दलीय विधायक
- फोटो : फाइल फोटो
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जानिए उन सात निर्दलीय विधायकों के बारे में, जो आज तय करेंगे कि हरियाणा में खट्टर के सिर दूसरी बार मुख्यमंत्री का ताज सजेगा या नहीं।
मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में भाजपा बहुमत से भले ही दूर रह गई है, लेकिन भाजपा की सरकार बनना लगभग तय हो गया है। पार्टी हाथ आए इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संकटमोचक बन कर रण में कूद गए हैं। चुनाव जीतने वाले सात में से पांच निर्दलीय भाजपा के बागी हैं। वीरवार देर रात ही पांच निर्दलीय विधायकों ने भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और हरियाणा भाजपा के प्रभारी और महासचिव अनिल जैन से मुलाकात की। ये हैं- सिरसा से गोपाल कांडा, पूंडरी से रणधीर गोलन, महम से बलराम कुंडू, रानियां से रणजीत सिंह, बादशाहपुर से राकेश दौलताबाद। दो और निर्दलीय विधायक दादरी से सोमवीर सांगवान और नीलोखेड़ी से धर्मपाल गोंदर से भी जेपी नड्डा और अनिल जैन को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
मनोहर लाल खट्टर
ऐसे बनेगी सरकार
हरियाणा में विधानसभा की 90 सीटे हैं। भाजपा को 40 सीटें मिली हैं। विधानसभा तक पहुंचने के लिए पार्टी को 46 सीटों की जरूरत है। ऐसे में सात निर्दलीय को शामिल करके ही पार्टी सरकार बना सकती है, लेकिन सूबे की जनता को स्थाई सरकार देने के लिए जननायक जनता पार्टी (जजपा) के अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। चूंकि पार्टी प्रदेश में स्थिर सरकार देना चाह रही है। इसलिए दुष्यंत को साथ लेकर चलना मजबूरी बन गया है। ऐेसे में दुष्यंत को उप-मुख्यमंत्री का पद ऑफर किया जा सकता है। जजपा ने चुनाव में 10 सीटों पर जीत हासिल की है।
हरियाणा में विधानसभा की 90 सीटे हैं। भाजपा को 40 सीटें मिली हैं। विधानसभा तक पहुंचने के लिए पार्टी को 46 सीटों की जरूरत है। ऐसे में सात निर्दलीय को शामिल करके ही पार्टी सरकार बना सकती है, लेकिन सूबे की जनता को स्थाई सरकार देने के लिए जननायक जनता पार्टी (जजपा) के अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। चूंकि पार्टी प्रदेश में स्थिर सरकार देना चाह रही है। इसलिए दुष्यंत को साथ लेकर चलना मजबूरी बन गया है। ऐेसे में दुष्यंत को उप-मुख्यमंत्री का पद ऑफर किया जा सकता है। जजपा ने चुनाव में 10 सीटों पर जीत हासिल की है।
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गोपाल कांडा
- फोटो : फाइल फोटो
सिरसा विधानसभा सीट
सिरसा सीट से हरियाणा लोकहित पार्टी के गोपाल कांडा 602 वोट से जीते हैं। यहां दूसरे स्थान पर स्वतंत्र उम्मीदवार गोकुल सेतिया रहे। इस सीट से 2014 में इनेलो के माखन लाल सिंगला 2938 वोटों से विजयी हुए थे। गोपाल कांडा कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता हुआ करते थे और हुड्डा सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। लेकिन विवादों में नाम आने के चलते कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
सिरसा सीट से हरियाणा लोकहित पार्टी के गोपाल कांडा 602 वोट से जीते हैं। यहां दूसरे स्थान पर स्वतंत्र उम्मीदवार गोकुल सेतिया रहे। इस सीट से 2014 में इनेलो के माखन लाल सिंगला 2938 वोटों से विजयी हुए थे। गोपाल कांडा कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता हुआ करते थे और हुड्डा सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। लेकिन विवादों में नाम आने के चलते कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
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बलराम कुंडू
- फोटो : फाइल फोटो
महम विधानसभा क्षेत्र
महम विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार बलराज कुंडू ने 12047 वोट से जीत हासिल की। यहां दूसरे नंबर पर कांग्रेस के आनंद शर्मा रहे। 2014 में इस सीट से कांग्रेस के आनंद सिंह डांगी चुनाव जीते थे। बलराज कुंडू टिकट न मिलने के चलते भाजपा से बगावत करके निर्दलीय मैदान में उतरे थे। पार्टी ने कुंडू की जगह महम सीट से शमशेर खरकड़ा को टिकट दिया था।
महम विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार बलराज कुंडू ने 12047 वोट से जीत हासिल की। यहां दूसरे नंबर पर कांग्रेस के आनंद शर्मा रहे। 2014 में इस सीट से कांग्रेस के आनंद सिंह डांगी चुनाव जीते थे। बलराज कुंडू टिकट न मिलने के चलते भाजपा से बगावत करके निर्दलीय मैदान में उतरे थे। पार्टी ने कुंडू की जगह महम सीट से शमशेर खरकड़ा को टिकट दिया था।