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GST का एक और सच सामने आया, इसके बारे में लोगों को बताया ही नहीं गया है
विनीत तोमर/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 20 Aug 2017 09:52 AM IST
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एक जुलाई से लागू हुए जीएसटी बिल का एक और नया सच सामने आया है, जिसके बारे में लोगों को बताया ही नहीं गया है। आप भी जान लीजिए, झटका लग सकता है।
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दरअसल, हाल ही में तय किया गया है कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर सहित पर्वतीय राज्यों में उद्योगों को मार्च 2027 तक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में छूट की सुविधा मिलती रहेगी। हालांकि उद्योगों को यह सुविधा रिफंड के रूप में मिलेगी। एक जुलाई से लागू होने के बाद इन राज्यों में लगने वाले उद्योगों को परोक्ष कर में छूट की सुविधा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
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सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार की कैबिनेट मीटिंग में यहा फैसला लिया गया। इसके तहत उद्योगों को 31 मार्च 2027 तक टैक्स रिफंड की सुविधा जारी रहेगी। सरकार अपने बजट से राशि आवंटित कर इन राज्यों में लगने वाली औद्योगिक इकाइयों को रिफंड जारी करेगी। जिन राज्यों को यह सुविधा मिलेगी उनमें सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, असम, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड और त्रिपुरा भी शामिल हैं।
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वहीं, देश में बाकी राज्यों में जीएसटी ने हर उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है। कुश्ती हो या कबड्डी, हॉकी हो या क्रिकेट, हर खेल में अव्वल रहने वाले हरियाणा के खेल कारोबार को जीएसटी ने बुरी तरह से प्रभावित किया है। गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने के दो माह के भीतर ही खेलों के सामान का कारोबार प्रदेश में 35 से 40 फीसदी तक नीचे गिर गया है। वहीं सामान की गुणवत्ता के कारण खेल पर भी असर पड़ रहा है।
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हरियाणा में औसतन हर घर से एक खेल प्रतिभा निकलती है, इसलिए यहां खेलों के सामान की भी बड़ी डिमांड रहती है। प्रदेश खेल सामान के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर है। खेल विभाग से लेकर कई यूनिवर्सिटी और खेल अकादमियों में मेरठ, दिल्ली और पटियाला से सामान आता है। मेरठ में तैयार क्रिकेट के सामान के मुरीद भारतीय टीम के खिलाड़ियों के साथ विदेशों में भी है। जीएसटी लागू होने के बाद से हरियाणा में खेल का सामान सप्लाई करने वाली कंपनियां कारोबार में 35 से 40 फीसदी तक गिरावट का दावा कर रही हैं।