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CWG2018: छोटी उम्र और तोड़ दिए दो वर्ल्ड रिकॉर्ड...पर जिंदगी की 'असली परीक्षा' अभी बाकी है

Sat, 14 Apr 2018 11:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 14 Apr 2018 11:23 AM IST
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gold medal to anish bhanwala in commonwealth games 2018
anish
छोटी सी उम्र और तोड़ दिए दो वर्ल्ड रिकॉर्ड, हुनर ऐसा जिसे देखकर दुनिया हैरान रह गई। लेकिन जिंदगी का असली इम्तिहान देना अभी बाकी है।
gold medal to anish bhanwala in commonwealth games 2018
anish bhanwala
26 सितंबर 2002 को हरियाणा के सोनीपत जिले के कसांदी गांव में पैदा हुए अनीश भानवाला ने 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में शुक्रवार को गोल्ड मेडल जीता। पुरुषों की 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल स्पर्धा का यह स्वर्ण पदक अनीश ने अपने नाम किया। अनीश ने फाइनल में कुल 30 अंक हासिल करते हुए गोल्ड मेडल जीता। अनीश ने पहली बार गेम्स में हिस्सा लिया और सफलता हासिल की।
gold medal to anish bhanwala in commonwealth games 2018
अनीश भानवाला
वहीं, अनीश ने कॉमनवेल्थ गेम्स में पदार्पण करते ही दो नए रिकॉर्ड भी कायम कर दिए। एक, अनीश ने 2014 में ग्लाग्सो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में आस्ट्रेलिया के डेविड चापमान की ओर से बनाए रिकॉर्ड को तोड़ दिया। दूसरा, अनीश सबसे कम उम्र में गोल्ड मेडल जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने मनु भाकर का रिकॉर्ड तोड़ा। मनु ने इन्हीं गेम्स में 16 की उम्र में गोल्ड जीतने का कारनामा किया था।
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gold medal to anish bhanwala in commonwealth games 2018
अनीश भानवाला
इससे पहले 1998 में अभिनव बिंद्रा 15 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लेने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। अब 15 की उम्र में इन गेम्स में गोल्ड जीतने वाले अनीश सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। लेकिन बता दें कि अनीश को जिंदगी की असली परीक्षा तो अब देनी है और वो हैं 10वीं के बोर्ड के एग्जाम जो आने वाली 16, 17, 18 अप्रैल को हैं।
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gold medal to anish bhanwala in commonwealth games 2018
अनीश भानवाला
दरअसल, कॉमनवेल्थ गेम्स में आने से पहले ही अनीश की मुश्किलें शुरू हो गई थी। अनीश को इस साल बोर्ड के एग्जाम देने थे। इसी वजह से उन्हें जूनियर वर्ल्ड कप का भी हिस्सा नहीं बनाया गया था, लेकिन कॉमनवेल्थ एक बहुत बड़ा मौका था। उनके एग्जाम और कॉमनवेल्थ साथ होने के कारण मुश्किल सामने आ गई थी। उन्होंने सीबीएसई को खत लिखकर निवेदन किया था कि बोर्ड उन्हें बाद में कम से कम एक पेपर देने के लिए सहमति दें।
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